
Date/16/07/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। लोकपर्व हरेला के पावन अवसर पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। देहरादून के कैनाल रोड स्थित चिड़ोवाली क्षेत्र से शुरू हुए ‘हरित दून अभियान’ के तहत अगले एक वर्ष में एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान की शुरुआत एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने पौधरोपण कर की। इस दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और अधिकारियों ने भी उत्साहपूर्वक पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तराखंड की आस्था और संवेदनशीलता का प्रतीक है। ऐसे में एमडीडीए का यह अभियान लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। चिड़ोवाली क्षेत्र में हुए पौधरोपण कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए गए। अधिकारियों ने बताया कि अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित निगरानी की भी व्यवस्था की जाएगी।
हरियाली से संवरने वाला है दून का
भविष्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घटते हरित क्षेत्र के बीच यह अभियान देहरादून के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। एमडीडीए का लक्ष्य शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, सड़कों के किनारे, पार्कों, संस्थानों और खाली पड़ी भूमि पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण करना है। इसके लिए स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवी संगठनों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से निभाई जा सके।
लोगों ने कहा-हर पौधा भविष्य की सांस
हरेला के दिन शुरू हुआ यह अभियान दून की धरती को हरियाली की नई पहचान देने की दिशा में उम्मीदों का एक नया पौधा बनकर उभरा है। कार्यक्रम में शामिल लोगों का कहना था कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। हरेला के अवसर पर शुरू हुआ यह अभियान लोगों को प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का एहसास कराता है। बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को उत्सव का रूप दे दिया। स्थानीय नागरिकों ने एमडीडीए की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख सुनिश्चित की जाए तो आने वाले वर्षों में देहरादून और अधिक हराभरा और प्रदूषणमुक्त बन सकेगा।




