
Date/25/09/2026
Mussoorie/ Uttarakhand prime 24×7
मसूरी। वंदे मातरम के ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विद्या भारती उत्तराखंड के तत्वावधान में महात्मा योगेश्वर सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज के सभागार में सामूहिक वंदे मातरम गान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज रयाल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘नमामि भारतम्-वंदे मातरम’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का राष्ट्रव्यापी जनसहभागिता अभियान है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता लेखिका एवं विचारक निधि बहुगुणा ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश की आजादी से पूर्व अंग्रेजी शासन के दौरान अनेक क्षेत्रों में स्वतंत्रता आंदोलन चल रहे थे। इसी दौर में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम की रचना की। उन्होंने बताया कि वर्ष 1875 में 7 नवंबर को यह रचना उनकी पत्रिका ‘बंग दर्शन’ में प्रकाशित हुई। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे संगीतबद्ध कर प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह गीत देशभर में लोकप्रिय हुआ। वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ प्रमुख उद्घोष बना।
सेवानिवृत्त कर्नल सुनील गुप्ता ने कहा कि वंदे मातरम की रचना गहन चिंतन के बाद हुई थी। उन्होंने कहा कि इस गीत का प्रत्येक शब्द और प्रत्येक छंद अपने आप में महत्वपूर्ण है तथा इसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया। मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि सामूहिक वंदे मातरम गायन हमारी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने देशवासियों को एक सूत्र में जोड़ने का काम किया। उन्होंने बताया कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्रदान की। इस अवसर पर नगर पालिका अधिशासी अधिकारी रजनीश डोबरियाल, शैलेंद्र कर्णवाल, मदनमोहन शर्मा, शरद गुप्ता, रजत अग्रवाल सहित विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं अन्य लोग मौजूद रहे।




