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जन सामान्य मंच का बड़ा ऐलानः अब चुनाव में वोट की चोट से होगा ’स्वार्थ की राजनीति’ का अंत

जन सामान्य मंच का बड़ा ऐलानः अब चुनाव में वोट की चोट से होगा ’स्वार्थ की राजनीति’ का अंत

Date/25/04/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में सवर्ण समाज ने अपनी उपेक्षा और मौजूदा राजनैतिक नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शुक्रवार को उत्तराखंड ब्राह्मण समाज महासंघ (पंजी.) के सौजन्य में ’जन सामान्य मंच’ ने उज्जवल रेस्टोरेंट में एक विशाल ’सवर्ण चिंतन गोष्ठी’ का आयोजन किया। इस बैठक में न केवल ब्राह्मण संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए, बल्कि अधिवक्ता, पत्रकार और किसान संघों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर भविष्य की राजनैतिक दिशा बदलने की शपथ ली। गोष्ठी में वक्ताओं ने दो-टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान राजनीति केवल सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का काम कर रही है। नेताओं की नीतियां देश की अखंडता के लिए खतरा बन गई हैं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही हैं। चर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से उभरी कि आज ’कॉमन मैन’ यानी उस जन सामान्य की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिसे किसी विशेष कोटे या दर्जे का लाभ नहीं मिलता। मंच के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कुमार पांडे ने संगठन की नींव और उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह मंच उन लोगों की आवाज बनेगा जिनके अधिकारों की बात आज की राजनीति में गौण हो चुकी है। पांडे ने जोर दिया कि सामाजिक समरसता और प्रकृति की रक्षा के साथ-साथ आपसी सद्भाव को बचाना ही इस संघर्ष का असली मकसद है।

इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित जुगल किशोर तिवारी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए ’राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा’ के गठन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब समाज को इन परंपरागत राजनैतिक दलों के जाल से बाहर निकलना होगा। गोष्ठी में मौजूद सभी समूहों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि चुनाव जीतने के लिए हथकंडे अपनाने वाले दलों का सामाजिक स्तर पर बहिष्कार किया जाएगा। मंच ने विशेष रूप से एससी-एसटी एक्ट, आरक्षण की वर्तमान स्थिति और यूजीसी रेगुलेशन के नाम पर फैलाई जा रही अराजकता को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। ब्राह्मण महासंघ ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में सवर्ण समाज केवल उन्हीं विकल्पों पर विचार करेगा जो उनके हितों और सामाजिक समानता की बात करेंगे, अन्यथा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार एक ठोस रणनीति के रूप में अपनाया जाएगा। गोष्ठी का सफल संचालन डॉ. वी.डी. शर्मा ने किया और अध्यक्षता पंडित विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने की। आज की इस सवर्ण चिंतन गोष्ठी में वरिष्ठ समाजसेवी पंडित लालचंद शर्मा, एस.पी.पाठक, विनोद नौटियाल, किसान नेता सुरेंद्र दत्त शर्मा, शशि कुमार शर्मा, मनमोहन शर्मा, अरुण कुमार शर्मा, अरुण शर्मा (किसान नेता), सिद्धनाथ उपाध्याय, अश्वनी मुद्गल एडवोकेट, राकेश पंडित (पार्षद) आदि ने भी संबोधित करते हुए अपने अपने विचार रखें।

आज की इस सवर्ण चिंतन गोष्ठी में नगर के महंत शशिकांत दूबे, बाल कृष्ण शास्त्री, जीतमणि पैन्यूली, केशव पचौरी सागर, सूर्य प्रकाश भट्ट, अशोक पाण्डेय, दिनेश मिश्रा, रजनीश त्रिवेदी, रजत शर्मा, अवनीशकांत शर्मा, शशिकांत मिश्रा, राजकिशोर तिवारी, उमाशंकर शर्मा, घनश्याम चंद्र जोशी, संजय पाठक, सुरेंद्र अग्रवाल, दिनेश कुमार मिश्रा, संत ओझा, दिनेश्वर नाथ द्विवेदी, हिमांशु द्विवेदी, डॉ.अजय वशिष्ठ, पंडित रामप्रसाद उपाध्याय आदि समेत इस चिंतन बैठक में भारी संख्या में महंत, पत्रकार और समाजसेवी जुटे, जिन्होंने संकल्प लिया कि वे अब खामोश नहीं बैठेंगे। गौरतलब है कि उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में पदोन्नति में आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को लेकर सामान्य और ओबीसी संगठनों का विरोध मुखर रहा है। साल 2020 के आसपास भी प्रदेश में इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन देखे गए थे, जिससे सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था। अब चुनाव से ठीक पहले ब्राह्मण महासंघ और जन सामान्य मंच का यह साझा मोर्चा राज्य की सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों, दोनों के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर सकता है, क्योंकि उत्तराखंड की राजनीति में सवर्ण मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।

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