कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने एसआइआर प्रक्रिया की अनियमितताओं को लेकर सीईओ से की मुलाकात – Uttarakhand Prime 24X7

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने एसआइआर प्रक्रिया की अनियमितताओं को लेकर सीईओ से की मुलाकात

Date/12/08/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व मे कांग्रेसजनों के प्रतिनिधमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन प्रेषित करते हुए एसआइआर प्रक्रिया के दौरान हो रही अनियमितता एवं एक व्यक्ति के नाम से 150 से अधिक आपत्तियां दर्ज होने पर विरोध जताते हुए इस सम्बन्ध में कार्रवाई की मांग की। गणेश गोदियाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में हा कि उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया दिनांक 29.05.2026 से प्रारम्भ हुई तथा प्रारूप निर्वाचक नामावली दिनांक 14.07.2026 को प्रकाशित की गई। दावे एवं आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 14.07.2026 से 13.08.2026 तक निर्धारित की गई थी। तथापि, इस दौरान कुछ असामान्य एवं गंभीर परिस्थितियां सामने आई हैं। फॉर्म-10 (दाखिल किए गए फॉर्म-7 का विवरण) के आंकड़ों के विश्लेषण के उपरांत कई चिंताजनक तथय सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी उपलब्ध आंकड़ों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ विभिन्न तिथियों पर उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष विस्तारपूर्वक उठाया गया है। इसका विवरण निम्नवत् है।

दिनांक 30.07.2026, दिनांक 06.08.2026 एवं दिनांक 10.08.2026 को इस सम्बन्ध में शिकायत के बावजूद बार-बार आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्तियों द्वारा फॉर्म-7 के लगातार सामूहिक दाखिले के दृष्टिगत तत्काल हस्तक्षेप, जांच एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु द्वितीय प्रत्यावेदन ऑनलाइन माध्यम से बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 दाखिल किए जाने के संबंध में बार-बार चेतावनी एवं शिकायत किए जाने के बावजूद इस समस्या का निराकरण नहीं हुआ है तथा स्थिति लगातार बनी हुई है।गणेश गोदियाल ने कहा कि हमारे बीएलए-2 द्वारा भी आपत्ति दर्ज की गई है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा एक ही प्रकार के अनेक फॉर्म-7 ऑनलाइन माध्यम से बार-बार दाखिल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्यापन के दौरान ऐसे अनेक निर्वाचक अपने घोषित पते पर निवास करते हुए पाए गए हैं। इससे उनके विरुद्ध की गई आपत्तियों की वास्तविकता एवं प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। कुछ मामलों में एक ही आपत्तिकर्ता द्वारा विभिन्न विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, जिससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से लक्षित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंनेे कहा कि फॉर्म-10 के आंकड़ों तथा आपत्तिकर्ताओं की संकलित सूची के प्रथमदृष्टया विश्लेषण से एक अत्यंत चिंताजनक स्थिति सामने आती है।

श्री गणेश गोदियाल ने कहा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा प्रति व्यक्ति 150 से अधिक आपत्तियां दाखिल की गई हैं। कई आपत्तिकर्ताओं द्वारा विभिन्न बूथों एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 50 से 150 तक आपत्तियां दाखिल की गई हैं। फॉर्म-7 की प्रक्रिया का इस प्रकार व्यवस्थित एवं बड़े पैमाने पर दुरुपयोग निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण की पारदर्शिता, जवाबदेही एवं विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 निर्वाचक नामावली में प्रविष्टियों से संबंधित झूठी घोषणा करने को अपराध मानती है। इसी प्रकार निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के अंतर्गत आपत्तियां विशिष्ट, सत्यापन योग्य तथा जांच के अधीन होनी चाहिए और उनका यांत्रिक रूप से निस्तारण नहीं किया जा सकता। बिना किसी सत्यापन योग्य आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल करना निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण के मूल सिद्धांतों के विपरीत है तथा निष्पक्ष एवं शुद्ध निर्वाचक नामावली तैयार करने के उद्देश्य को प्रभावित करता है। किसी लोक प्राधिकारी के समक्ष झूठी सूचना प्रस्तुत करना भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत दंडनीय परिणाम भी उत्पन्न कर सकता है। कांग्रेस पार्टी द्वारा पूर्व में किए गए प्रत्यावेदनों के बावजूद बार-बार आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से आपत्तियां दाखिल किए जाने की प्रवृत्ति से यह प्रतीत होता है कि वैधानिक व्यवस्था के दुरुपयोग की संगठित संभावना है। इससे वास्तविक एवं पात्र मतदाताओं के नाम लक्षित तरीके से बड़ी संख्या में हटाए जाने का खतरा उत्पन्न हो सकता है तथा प्रभावी सत्यापन एवं नियामकीय सुरक्षा उपायों के अभाव की स्थिति भी सामने आती है। इस प्रकार की गतिविधियां निर्वाचक नामावली की पवित्रता एवं विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं तथा निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति आम जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती हैं। अतः उपर्युक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सभी संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को तत्काल स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि जिन मामलों में किसी एक आपत्तिकर्ता द्वारा एक ही विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र अथवा विभिन्न विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में अनेक फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, उनकी तत्काल विस्तृत जांच कराई जाए।

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