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रूद्रप्रयाग में लंपी पर वारः पपडासू गौशाला में चला सघन टीकाकरण अभियान

कृमिनाशक वितरण के साथ पशुपालकों को किया गया जागरूक

Date/26/02/2026

Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7 

रूद्रप्रयाग। जनपद के पपडासू स्थित निराश्रित गौवंश शाला में लंपी स्किन डिजीज के खिलाफ पशुपालन विभाग ने बड़ा अभियान चलाया। पशु चिकित्सालय चौंरिया भरदार की टीम ने मौके पर पहुंचकर पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। लंपी रोग का टीकाकरण किया तथा कृमिनाशक दवाओं का वितरण कर पशुपालकों को आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।

अभियान में पशुचिकित्साधिकारी डॉ. अजय प्रकाश, पशुधन प्रसार अधिकारी राजेन्द्र मनवाल, फार्मेसी अधिकारी जगदीश खत्री एवं पशुधन सहायक रमेश भारद्वाज मौजूद रहे। टीम ने गौशाला में मौजूद पशुओं की जांच कर संक्रमण से बचाव के उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

डॉ. अजय प्रकाश ने बताया कि लंपी रोग एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और बैलों को प्रभावित करती है। यह रोग कैप्रिपॉक्स वायरस से होता है, जिसे लंपी स्किन डिजीज वायरस कहा जाता है। यह वायरस तेजी से फैलता है और पशुपालकों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। उन्होने बताया कि लंपी रोग मुख्यतः कीटों के माध्यम से फैलता है, जिनमें मच्छर, मक्खी, जूं, टिक (किलनी) के अलावा संक्रमित पशु के सीधे संपर्क, दूषित चारा-पानी और संक्रमित उपकरणों के उपयोग से भी यह रोग फैल सकता है। संक्रमण के 4-10 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसके प्रमुख लक्षण में 104-106 डिग्री फारेनहाइट तक तेज बुखार, शरीर पर 2-5 सेमी की गोल गांठें, आंख और नाक से स्राव, दूध उत्पादन में भारी गिरावट, पैरों में सूजन, कमजोरी और भूख में कमी, गर्भपात की आशंका, गांठें बाद में फटकर घाव का रूप ले सकती हैं, जिससे पशु की स्थिति गंभीर हो जाती है। लंपी रोग से पशु का वजन घटता है, चमड़ी खराब होती है और प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। गंभीर मामलों में पशु की मृत्यु तक हो सकती है। बताया कि फिलहाल इस रोग का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। उपचार लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें बुखार कम करने की दवा, द्वितीयक संक्रमण रोकने को लेकर एंटीबायोटिक, सूजन कम करने की दवा और घाव की सफाई शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर टीकाकरण ही सबसे प्रभावी बचाव है। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि संक्रमित पशु को तुरंत अलग रखें। पशुशाला में नियमित कीटनाशक छिड़काव करें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। नए पशु को जांच के बाद ही झुंड में शामिल करें। लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया कि लंपी रोग गंभीर अवश्य है, लेकिन सतर्कता, स्वच्छता और समय पर टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है। विभाग की टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी और टीकाकरण अभियान जारी रखे हुए है, ताकि जनपद में पशुधन को सुरक्षित रखा जा सके।

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