Dehradunउत्तराखंड

लेखक गांव बना अनुभवात्मक शिक्षा का केंद्र

लखनऊ विश्वविद्यालय के एम.एड विद्यार्थियों ने जाना भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व

Date/26/06/2026

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देहरादून। लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा एम.एड. के विद्यार्थियों के लिए देश के पहले लेखक गांव में 25 जून 2026 को एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक भ्रमण में एम.एड. के छात्र-छात्राओं एवं विभाग के संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भ्रमण का नेतृत्व शिक्षाशास्त्र विभाग की प्रोफेसर एवं भ्रमण प्रभारी प्रो. किरण लता डंगवाल ने किया। उनके साथ विभाग के प्रो. सर्वण कुमार भी उपस्थित रहे। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने लेखक गांव परिसर में स्थित प्राचीन भगवान नरसिंह नागराजा मंदिर के दर्शन किए। इसके उपरांत उन्होंने ध्यान वाटिका में ध्यान एवं आत्मअनुभूति का अभ्यास किया। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने लेखक गांव की ज्ञान-वाटिकाओंकृसंजीवनी वाटिका, नवग्रह वाटिका एवं नक्षत्र वाटिकाकृमें स्थापित औषधीय पौधों का अवलोकन किया तथा क्यूआर कोड के माध्यम से उनके औषधीय गुणों एवं उपयोगिता की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद विद्यार्थियों ने लेखक गांव की आत्मा नालंदा पुस्तकालय एवं शोध एवं अनुसंधान केंद्र का अवलोकन किया, जहाँ 60,000 से अधिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। साथ ही विद्यार्थियों ने अटल प्रेक्षागृह का भी भ्रमण किया। इस संपूर्ण अनुभव के दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, शोध संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के विविध आयामों को निकटता से समझा। यह शैक्षणिक भ्रमण उनके लिए पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अनुभवात्मक अधिगम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों की भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री, प्रख्यात साहित्यकार एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से आत्मीय भेंट एवं विस्तृत संवाद हुआ। डॉ. निशंक ने शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, राष्ट्र निर्माण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीतिदृ2020 के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति केवल पाठ्यक्रम परिवर्तन का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, नवाचार, कौशल विकास और मानवीय मूल्यों को शिक्षा से जोड़ने का एक व्यापक राष्ट्रीय संकल्प है।

उन्होंने कहा, “एक शिक्षक केवल विषय का अध्यापक नहीं होता, बल्कि वह समाज का निर्माता और राष्ट्र के भविष्य का शिल्पकार होता है। यदि शिक्षक संवेदनशील, शोधपरक और मूल्यनिष्ठ होगा, तो भारत का भविष्य भी उतना ही उज्ज्वल होगा।” उन्होंने भावी शिक्षकों से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सृजनात्मकता एवं भारतीय सांस्कृतिक चेतना विकसित करने तथा शिक्षा को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाने का आह्वान किया। डॉ. निशंक ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए निरंतर अध्ययन, अनुसंधान, नवाचार एवं नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

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