
Date/25/08/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। सूबे में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य कैबिनेट ने आज ‘उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026’ को मंजूरी दे ही है। इस नीति का उद्देश प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास, स्थानीय उद्यमिता, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। सात रणनीतिक स्तम्भों पर आधारित यह नीति गांव-गांव में सहकारिता को बढ़ावा देने को व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है।
सहकारिता विभाग के अधिकारियों को मुताबिक राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 की मूल भावना “सहकार से समृद्धि” को दृष्टिगत रखते हुये प्रदेश की सहकारिता नीति को तैयार किया गया है। जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों की छोटी एवं सीमांत जोतें, बिखरी ग्रामीण आबादी, पलायन, सीमित औद्योगिकीकरण, जलवायु परिवर्तन तथा दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखा गया। नई नीति में सहकारिता को केवल ऋण वितरण की व्यवस्था तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूती के लिये विशेष प्रबंध किये गये हैं।
सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित होगी नई सहकारी व्यवस्था
उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति-2026 को सात प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित किया गया है। इनमें सहकारिता की बुनियाद को मजबूत करना, सहकारी संस्थाओं की जीवंतता, भविष्य के लिए तैयारी, समावेशिता एवं पहुंच का विस्तार, नए एवं उभरते क्षेत्रों में प्रवेश, सहकारिता से युवा पीढ़ी को जोड़ना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण प्रमुख हैं।
पैक्स बनेंगे बहुउद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र
नई नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पैक्स को केवल ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय, आत्मनिर्भर और व्यावसायिक ग्रामीण आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि उद्यान, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराया, बीमा, पेंशन, डिजिटल बैंकिंग और अन्य ग्रामीण सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके अलावा हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़ने पर भी विशेष जोर रहेगा।
सहकारिता में मिलेगा महिलाओं व युवाओं को नेतृत्व का अवसर
नीति में महिला और युवा भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक जनपद में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने, स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण एवं बाजार से जोड़ने तथा युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा तय की गई है। सहकारिता को युवाओं के लिए सम्मानजनक एवं आकर्षक करियर विकल्प बनाने के लिए प्रशिक्षण, शोध, प्रबंधन एवं आधुनिक कौशल विकास तंत्र को मजबूत किया जाएगा।




