Date/28/10/2026
Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। देहरादून जनपद में निराश्रित एवं पालतू पशुओं के प्रभावी प्रबन्धन, पशु कल्याण सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चैहान ने ऋषिपर्णा सभागार में नगर निगम, नगर निकाय, पशुपालन विभाग एवं संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पशुओं के पंजीकरण, निगरानी, गौशालाओं के संचालन, पशु चिकित्सा सेवाओं तथा हेल्पलाइन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं संबंधित निकायों को निर्देशित किया कि निराश्रित एवं पालतू पशुओं के पंजीकरण और प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित किया जाए, जिससे प्रत्येक पशु का विवरण प्रशासन के पास उपलब्ध रहे। पोर्टल के माध्यम से पशुओं की संख्या, पंजीकरण की स्थिति तथा संबंधित अन्य आवश्यक जानकारियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि पशुओं के प्रबन्धन एवं निगरानी में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने नगर निगम एवं समस्त नगर निकाय क्षेत्रों में संचालित डेयरियों का विस्तृत सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए। सर्वेक्षण के दौरान डेयरियों की संख्या, उनमें रखे गए पशुओं की संख्या तथा पंजीकृत पशुओं का पूरा विवरण संकलित किया जाए। उन्होंने कहा कि पशुओं से संबंधित आंकड़ों का अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से प्रबन्धन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
जिलाधिकारी ने पशु हेल्पलाइन नंबर 1962 पर शिकायतों का उचित रिस्पॉन्स नहीं मिलने तथा पशु एम्बुलेंस उपलब्ध न होने संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लिया। व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उन्होंने स्वयं हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल किया। कॉल पर अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संबंधित कार्मिकों की जवाबदेही निर्धारित करने तथा उनके वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार एवं रेस्क्यू से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो तथा पशु एम्बुलेंस की उपलब्धता एवं संचालन व्यवस्था की प्रभावी निगरानी की जाए, ताकि जरूरतमंद पशुओं को समय पर सहायता मिल सके।
जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं नगर निकाय क्षेत्रों के प्रमुख प्रवेश एवं निकासी मार्गों पर कैमरे स्थापित करने के निर्देश दिए, जिससे पशुओं के आवागमन की निगरानी की जा सके। उन्होंने निराश्रित गौवंशीय पशुओं को पकड़ने तथा उनके समुचित प्रबन्धन के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि जनपद में संचालित गौशालाओं में निराश्रित पशुओं के रखरखाव, चारे-पानी, साफ-सफाई एवं चिकित्सकीय उपचार की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। गौशालाओं की नियमित निगरानी करते हुए वहां उपलब्ध सुविधाओं और पशुओं की स्थिति का आकलन किया जाए। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को प्रभावी मॉनिटरिंग करने तथा गौशाला प्रबन्धकों को व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए कड़े निर्देश जारी करने को कहा।