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तेजी से बढ़ रही क्रोनिक किडनी डिजीज

तेजी से बढ़ रही क्रोनिक किडनी डिजीज

Date/24/07/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। किडनी की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों या डायबिटीज वाले लोगों को ही नहीं हो रही है बल्कि हेल्थ एक्सपर्ट्स अब युवा प्रोफेशनल्स, जो देखने में स्वस्थ लगते हैं और जिनकी रूटीन ब्लड रिपोर्ट भी सामान्य होती है, उन लोगों में भी किडनी में शुरुआती नुकसान के लक्षण देख रहे हैं। भारत में क्रोनिक किडनी डिजीज तेजी से बढ़ रही है। अध्ययनों से पता चला है कि 15 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों में इसके मामले 11.12 प्रतिशत (2011 से 2017) से बढ़कर 16.38 प्रतिशत (2018 से 2023) हो गए हैं। अनुमान है कि 2021 में लगभग 12.8 करोड़ भारतीय सीकेडी से प्रभावित थे। इस आंकड़े के साथ यह देश में मौत का एक तेजी से बढ़ता हुआ कारण बन गया है।

आरजी हॉस्पिटल्स, देहरादून के रीनल ट्रांसप्लांट-एंड्रोलॉजी, यूरोलॉजी के कंसल्टेंट डॉ. नितीश देव ने कहा, सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि अगर सीरम क्रिएटिनिन की रिपोर्ट सामान्य है, तो किडनी पूरी तरह स्वस्थ है। असल में किडनी को नुकसान चुपचाप शुरू हो सकता है और क्रिएटिनिन का लेवल असामान्य होने से पहले यह कई सालों तक नुकसानग्रस्त होती हुई रह सकती है। सही स्क्रीनिंग से शुरुआती पहचान करके लंबे समय की जटिलताओं को रोका जा सकता है और कई मामलों में समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव करके शुरुआती नुकसान को ठीक भी किया जा सकता है। कारण और खतरा-लंबे समय तक डेस्क पर काम करने और पर्याप्त पानी न पीने के कारण लगातार डिहाइड्रेशन होना।-प्रोसेस्ड, पैक्ड और ज्यादा सोडियम वाले खाने की चीजों का बार-बार सेवन करना-डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द कम करने वाली दवाइयों (पेनकिलर्स) का लगातार सेवन करना

-प्रोटीन सप्लीमेंट्स का बहुत ज्यादा या बिना सही जानकारी के सेवन करना-लंबे समय तक बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि की कमी वाली सुस्त लाइफस्टाइल जीना, नींद की खराब गुणवत्ता और काम की जगह पर लगातार तनाव से ग्रसित रहना, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का पता न चलना या उन्हें ठीक से नियंत्रित न कर पाना, किडनी की बीमारी या मेटाबोलिक डिसऑर्डर की फैमिली हिस्ट्री होना शामिल है। रूटीन चेकअप में शुरूआती किडनी का नुकसान क्यों पकड़ में नहीं आ सकता है? ज्यादातर सालाना हेल्थ पैकेज सिर्फ सीरम क्रिएटिनिन पर निर्भर करते हैं, जो अक्सर तब तक सामान्य रिजल्ट दिखा सकता है जब तक कि किडनी काफी हद तक काम करना बंद न कर दे। यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेश्यो टेस्ट से माइक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया का पता लगाया जा सकता है, यानी यूरिन में बहुत कम मात्रा में प्रोटीन का रिसना, जो अक्सर किडनी को नुकसान पहुँचने का सबसे शुरुआती संकेत होता है। जब तक किसी व्यक्ति को पहले से ही डायबिटीज या हाइपरटेंशन न हो, तब तक स्टैंडर्ड वेलनेस चेक-अप में यूरिन ।ब्त् टेस्ट को आम तौर पर शामिल नहीं किया जाता है। इस स्टेज पर किडनी पर पड़ने वाले दबाव का पता चलने से किडनी को हमेशा के लिए नुकसान पहुँचने से पहले ही सही समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

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