टीचिंग लर्निंग के माध्यम से एकेडमिक कलैण्डर 10 जुलाई से होगा शुरू – Uttarakhand Prime 24X7

टीचिंग लर्निंग के माध्यम से एकेडमिक कलैण्डर 10 जुलाई से होगा शुरू

देहरादून। श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एन के जोशी ने कहा कि अब समस्त संस्थानों के दाखिले समर्थ पोर्टल से ही कराये जायेगे। यदि राजकीय महाविद्यालयोंध्संस्थानों में रिसर्च होगी तो तभी नैक, एनआईआरएफ रैंकिंग आदि की ग्रेडिंग मिलेगी। जोशी ने कहा कि टीचिंग लर्निंग के माध्यम से एकेडमिक कलैण्डर 10 जुलाई,2023 से शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी के अनुसार सैमेस्टर सिस्टम 90 दिन का रहेगा। जिसमें से 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। 2018 के बाद से जो रिजल्ट बैकलॉक के थे उन्हें पूर्ण करा लिया गया है और जो छूट गये हैं। उन्हें अतिशीघ्र पूर्ण करवा दिया जायेगा। सोमवार को राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान राजपुर रोड में जोशी द्वारा बैठक ऑनलाईन ऑफलाईन मोड में आहूत की गयी। जिसमें राजकीयध्अशासकीयध्निजी शिक्षण संस्थानों के प्राचार्योंध्अध्यक्षोंध्निदेशकों द्वारा प्रतिभाग किया जिसमें लगभग 120 लोग ऑफलाईन एवं 100 से अधिक लेागों ने ऑनलाईन माध्यम से प्रतिभाग किया । विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा सभी संस्थानों राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्योंध्अध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि टीचिंग एवं रिसर्च पर सबसे अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। जोशी ने इस सम्बन्ध में संस्थानों को निर्देशित किया कि वे बैकलॉग परिणाम से सम्बन्धित छात्र-छात्राओं की सूची अतिशीघ्र विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा दे।नई शिक्षा नीति-2020 के तहत द्वितीय सैमेस्टर की कक्षायें 12 अप्रैल, 2023 से प्रारम्भ कर दी गयी हैं तथा द्वितीय सैमेस्टर की परीक्षायें जुलाई, 2023 के आखिरी सप्ताह या अगस्त प्रथम सप्ताह में सम्पन्न करायी जायेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये मंत्र जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान के मंत्र को सफल बनाने हेतु महाविद्यालय स्तरों पर रिसर्च में पेपर प्रकाशित करना, सेमिनार आयोजित करना, और एफडीपी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यता है। उन्होनें कहा कि समस्त महाविद्यालय अपने स्तर पर शोध एवं विकास सेल, आईक्यूऐसी, एमएसएमई, इनोवेशन एवं इन्क्यूवेशन केन्द्र इत्यादि को स्थापित करें जिससे छात्रों एवं प्राध्यापकों को शोध में आसानी हो एवं विश्वविद्यालय के प्रति लोगों का नजरिया बदले एवं विश्वविद्यालय राष्ट्र स्तर पर ही नहीं अपितु विश्व स्तर पर भी ख्याति प्राप्त करे।

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