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जाति की राजनीति पर अमित मैखंडी का कांग्रेस पर सीधा प्रहार

दशकों तक सत्ता में रहे, फिर अनुसूचित समाज के गांव आज भी पिछड़े क्यों

Date/30/08/2026

Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7 

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड की सियासत में जातीय राजनीति को लेकर केदारघाटी के त्रियुगीनारायण क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य अमित मैखंडी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों के जरिए जातीय आधार पर समाज को बांटने की कोशिशों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मैखंडी ने कांग्रेस नेतृत्व से सीधा सवाल कियाकृआजादी के बाद दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद अनुसूचित समाज के अनेक गांव आज भी गरीबी, पिछड़ेपन और मूलभूत सुविधाओं की कमी से क्यों जूझते रहे?

मैखंडी ने कहा कि यदि कांग्रेस अनुसूचित समाज की इतनी बड़ी हितैषी है तो उसे यह भी बताना चाहिए कि लंबे राजनीतिक शासन के दौरान शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक अवसरों के क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव क्यों नहीं आ पाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए जातीय भावनाओं को हवा देना उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ है।

अमित मैखंडी ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और भगवान विश्वकर्मा किसी एक जाति अथवा समाज की विरासत नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव हैं। उनके नाम पर राजनीतिक विभाजन खड़ा करने के बजाय उनके विचारों को समाज में उतारने की जरूरत है। उन्होंने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता तथा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न दिए जाने और उनके जीवन से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किए जाने का भी जिक्र किया।

जातीय विभाजन की राजनीति पर हमला बोलते हुए मैखंडी ने केदारघाटी में चल रही अपनी आराध्य मां महिषमर्दिनी देवी की देवरा यात्रा को उत्तराखंड की सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देवरा यात्रा में ठाकुर, राजपूत, ब्राह्मण, अनुसूचित समाज समेत विभिन्न वर्गों के लोग एक ही आस्था और श्रद्धा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। “यही उत्तराखंड की असली पहचान है। यहां जाति नहीं, आस्था बड़ी है। यहां भेदभाव नहीं, भाईचारा बड़ा है और यहां राजनीति नहीं, देवभूमि की संस्कृति बड़ी है।”

मैखंडी ने कहा कि जब मां की डोली निकलती है तो किसी से उसकी जाति नहीं पूछी जाती। सभी वर्गों के लोग श्रद्धा के साथ डोली के पीछे चलते हैं। यही देवभूमि की वह संस्कृति है, जिसे राजनीतिक स्वार्थ के लिए कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। जिला पंचायत सदस्य ने कांग्रेस नेताओं से अपील करते हुए कहा कि राजनीति में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन समाज के बीच मनभेद पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण हो या राजपूत, अनुसूचित समाज हो या सामान्य वर्ग, व्यापारी हो या किसानकृसभी देवभूमि के नागरिक हैं और सभी का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा है। मैखंडी ने अपने बयान के जरिए राजनीतिक दलों को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब समाज को जातियों में बांटने के बजाय शिक्षा, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, पलायन और आर्थिक विकास जैसे वास्तविक मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए। अमित मैखंडी के इस बयान ने उत्तराखंड की राजनीति में जातीय विमर्श को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनका बयान खासतौर पर ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में जातीय पहचान और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार सुर्खियों में है।

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