केदारनाथ यात्रा मार्ग पर नकली शिलाजीत और केसर का खेल
करोड़ों की आस्था के बीच फल-फूल रहा कथित फर्जी कारोबार

Date/31/05/2026
Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7
रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक भावनाओं का प्रतीक है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए हिमालय की कठिन चढ़ाई तय करते हैं। लेकिन इसी पवित्र यात्रा के बीच कथित रूप से नकली शिलाजीत, केसर और अन्य उत्पादों का कारोबार श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य, उनकी जेब और उनकी आस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर इन दिनों शिलाजीत, कश्मीरी केसर, जड़ी-बूटियों और अन्य औषधीय उत्पादों के नाम पर बड़ी मात्रा में सामान बेचा जा रहा है। दावा किया जाता है कि ये उत्पाद हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियों से तैयार किए गए हैं और अनेक बीमारियों में लाभदायक हैं। लेकिन कई जानकारों और स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि इनमें से बड़ी संख्या में उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता संदिग्ध है तथा कई मामलों में नकली सामान ऊंचे दामों पर श्रद्धालुओं को बेचा जा रहा है।
यात्रा मार्ग पर पिछले लगभग दस वर्षों से रोजगार कर रहे हरिद्वार निवासी पप्पू सिंह का कहना है कि चारधाम यात्रा शुरू होते ही राजस्थान, गुजरात, मुंबई, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से लोग अस्थायी रूप से पहुंचते हैं और शिलाजीत, केसर तथा अन्य उत्पादों की बिक्री शुरू कर देते हैं। उनका आरोप है कि इनमें से कई विक्रेता सीजन समाप्त होते ही वापस लौट जाते हैं, जिससे बाद में किसी शिकायत या कार्रवाई की स्थिति में उन्हें तलाशना भी मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि यात्रा मार्ग पर कई बार ऐसे उत्पाद खुलेआम बिकते दिखाई देते हैं जिनकी न तो गुणवत्ता की कोई गारंटी होती है और न ही किसी प्रकार का प्रमाणपत्र। बावजूद इसके, ऊंचे मुनाफे के लालच में श्रद्धालुओं को बड़े-बड़े दावे करके सामान बेचा जाता है।
स्थानीय व्यापारी नितिन जमकोली, अशोक सेमवाल का कहना है कि कुछ लोगों की कथित अवैध गतिविधियों के कारण पूरे व्यापारिक समुदाय की छवि खराब होती है। वर्षों से ईमानदारी से व्यवसाय कर रहे व्यापारियों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि प्रशासन यदि नियमित जांच और सत्यापन अभियान चलाए तो ऐसे तत्वों पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है। चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यात्रा मार्ग से गुजर रहे हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग, औषधि नियंत्रण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यात्रा मार्ग पर खाद्य पदार्थों और औषधीय उत्पादों की नियमित जांच हो तो नकली सामान बेचने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। लोगों का आरोप है कि वर्षों से इस प्रकार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई के उदाहरण कम दिखाई देते हैं। यही कारण है कि कथित रूप से यह कारोबार लगातार जारी है।




