कस्टम और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर लोगों से की करोड़ों की ठगी करने का आरोपी गिरफ्तार – Uttarakhand Prime 24X7

कस्टम और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर लोगों से की करोड़ों की ठगी करने का आरोपी गिरफ्तार

दिनांक/30/6/24

Dehradun/Uttarakhandprime 24×7

देहरादून। कस्टम डिपार्टमेंट और क्राइम ब्रांच मुंबई के नाम से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को उत्तराखंड एसटीएफ ने बहराइच (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया है। आरोपी अब तक कई राज्यों में करोड़ों की ठगी को अन्जाम दे चुका है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में देहरादून निवासी वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें बताया था कि अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा उसके मोबाइल पर संपर्क कर खुद को कोरियर कंपनी और क्राईम ब्रांच अंधेरी से बताया गया। इसके बाद मुंबई कस्टम द्वारा पीड़ित के नाम से अवैध पासपोर्ट और क्रेडिट कार्ड सीज करने की जानकारी दी गई और मुंबई क्राइम ब्रांच अंधेरी से संपर्क करवाकर पीड़ित को स्काइप ऐप पर जोड़ा गया।

उसके बाद वीडियो कॉल पर पुलिस थाना दर्शाकर पार्सल के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, पहचान छुपाने के संबंध में फर्जी नोटिस भेजकर पीड़ित के नाम से चल रहे खातों में 38 मिलियन का अवैध ट्रांजेक्शन होना बताया गया। ऐसे में पासपोर्ट कार्यालय और मुंबई क्राइम ब्रांच से क्लीयरेंस प्रदान करने का झांसा देकर और जांच के नाम पर पीड़ित से 1 करोड़ 13 लाख रुपए की ठगी की गई। पीड़ित की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी करने के लिए गठित टीम ने घटना में प्रयोग मोबाइल नंबर और संबंधित खातों की जानकारी की। जिसके बाद अपराध में शामिल 3 आरोपियों को कोटा राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद टीम ने आरोपियों द्वारा पीड़ित को जो खाता संख्या और मोबाइल नंबर दिए थे, उसके बारे में जानकारी ली और एक अन्य आरोपी को बहराइच (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया। एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि आरोपी द्वारा कोरियर कंपनी, कस्टम डिपार्टमेंट और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर लोगों से मुंबई कस्टम द्वारा अवैध पासपोर्ट, अवैध ड्रग्स और क्रेडिट कार्ड सीज करने की जानकारी देकर लोगों को मनी लांड्रिंग, ड्रग्स तस्करी का संदिग्ध बताया जाता था। इसके बाद लोगों को फर्जी नोटिस भेजकर केस का निपटारा करने के नाम पर धोखाधड़ी की जाती थी।

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