दिनांक/18/03/2025
Dehradun/Uttarakhandprime 24×7
देहरादून। पोलैंड के उप-विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टाेस्ज़ेव्स्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को वर्तमान में जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष में सामरिक परमाणु हथियारों का उपयोग न करने के लिए राजी करने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वपूर्ण कूटनीतिक हस्तक्षेप को स्वीकार किया। यह वैश्विक शांति प्रयासों में एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ष्प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा बहुत शानदार रही। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को सामरिक परमाणु हथियारों का उपयोग न करने के लिए राजी किया। हम स्थायी शांति चाहते हैं। हम यूक्रेन में स्थिर और दीर्घकालिक शांति चाहते हैं।
राष्ट्रपति पुतिन ने स्वयं भारत के कूटनीतिक प्रयासों को मान्यता दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सहित प्रमुख वैश्विक नेता इस शत्रुता को समाप्त करने में अपना समय और प्रयास दोनों दे रहे हैं साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष के समाधान में भारत का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ष्हम सभी के पास अपने घरेलू मामले निपटाने के लिए बहुत कुछ है लेकिन कई देशों के नेता, जिनमें भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल हैं, इस मुद्दे पर ध्यान देने के साथ-साथ इस मामले पर अपना काफी समय भी दे रहे हैं। हम उन सभी के आभारी हैं। रूस के साथ भारत के संबंध लगातार परिपुष्ट हो रहे हैं, राष्ट्रपति पुतिन ने इसे ष्खासतौर पर विशेषाधिकार प्राप्तष् बताया है। वर्तमान में जारी युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा ने भारत के तटस्थ रुख और शांति के मामले में प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भारत को संघर्ष को हल करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक शिखर सम्मेलन आयोजित करने का सुझाव भी दिया, जो भारत के बढ़ते वैश्विक कूटनीतिक कद को दर्शाता है।प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका 2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा का भारत में प्रत्यार्पण किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, ष्हम एक बहुत ही खतरनाक व्यक्ति को भारत को सौंप रहे हैं, जो 26/11 के मुंबई आतंकी हमले का आरोपी है। भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के पाकिस्तान के प्रयासों के बावजूद, सऊदी अरब ने भारत के इस कदम का समर्थन किया, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का पता चलता है। इस निर्णय के शीघ्र बाद, भारत और सऊदी अरब ने 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। यूएई ने भी भारत का समर्थन करते हुए, इसे आंतरिक मामला बताया और क्षेत्रीय स्थिरता की आशा व्यक्त की। रूस, इजरायल, बहरीन और ईरान ने भारत के निर्णय का समर्थन किया, जिससे भारत की कूटनीतिक क्षमता में वृद्धि हुई।