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वर्ष वर्धन दिवस पर ब्रह्मचारिणी रितु दीदी ने पूर्णमति माताजी का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया

उत्तम शौच धर्म लोभ का त्याग और आत्म-पवित्रता का संदेश देताः पूर्णमति माताजी

Date/19/09/2026

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देहरादून। जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के चैथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। गांधी रोड स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन धर्मशाला में परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पूज्य ब्रह्मचारिणी रितु दीदी के वर्ष वर्धन दिवस (जन्मदिवस) पर श्रद्धालुओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। रितु दीदी ने पूर्णमति माताजी का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

धर्मसभा में पूर्णमति माताजी ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि उत्तम शौच धर्म लोभ और लालच का त्याग कर संतोष तथा आत्म-पवित्रता को अपनाने की प्रेरणा देता है। लोभ सभी पापों की जड़ है। तीव्र लालच आत्मा को अशांत और मलिन करता है। संतोष और समता रूपी निर्मल जल से ही लोभ रूपी मैल को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाहरी शुद्धि से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक शुद्धि है। गंगा-यमुना अथवा समुद्र के जल से शरीर को बार-बार धोने पर भी आत्मा की वास्तविक पवित्रता प्राप्त नहीं होती। शरीर नश्वर और परिवर्तनशील है, जबकि सच्ची पवित्रता आत्मा के स्वभाव में निहित है।

माताजी ने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं असीम होती हैं। धन और भोग-विलास की असीम चाह व्यक्ति को अशांति की ओर ले जाती है। जो व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को सीमित करता है और प्राप्त वस्तुओं में संतोष रखता है, वही वास्तविक सुख और शांति का अनुभव करता है। शील, जप, तप और ध्यान के भाव जीव को शुचि अर्थात पवित्र बनाते हैं। उत्तम शौच धर्म के अवसर पर प्रतिदिन की भांति प्रातःकाल से ही अभिषेक, पूजन, पाठ, प्रवचन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोपहर 2 बजे विद्या सिंधु बालिका मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। शाम 8.30 बजे जैन मिलन शिवालिक, जैन वीरांगना मंच एवं दिगंबर जैन महासमिति, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महावीर भगवान के पांच नामों में से चार नामोंकृवीर, अतिवीर, सन्मति और महावीरकृके नाम पर टीमों का गठन किया गया। प्रत्येक टीम में चार सदस्य शामिल रहे।

धार्मिक अंताक्षरी में शब्द राउंड, अक्षर राउंड, रिलेशन राउंड, पूजा के अर्घ राउंड एवं रैपिड राउंड सहित पांच चरण रखे गए। सभी टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए एक से बढ़कर एक उत्तर दिए। भक्ति, ज्ञान और मनोरंजन से भरपूर इस आयोजन का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में दिगंबर जैन महासमिति एवं जैन मिलन शिवालिक की वीरांगनाओं द्वारा प्रार्थना प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात जैन वीरांगना मंच द्वारा सुंदर मंगलाचरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन वीरांगना बबीता जैन एवं उनकी टीम ने किया। इस अवसर पर तीनों संस्थाओं के अध्यक्ष, मंत्री एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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