
Date/03/09/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी मामले को लेकर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि खड़गे जी 25 दिन का हिसाब मांग रहे हैं, लेकिन देश कांग्रेस से पूछ रहा है कि उसे वास्तव में न्याय और दलित सम्मान की चिंता है या फिर हर मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा को घेरने की राजनीति करनी है। श्री भट्ट ने कहा कि देवभूमि की सामाजिक संस्कृति और यहां की समरस परंपरा को समझे बिना छुआछूत जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक हथियार बनाना कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति का उदाहरण है। उत्तराखंड की जनता सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने वाली ऐसी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
श्री भट्ट ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी को हल्द्वानी पर राजनीति करने से पहले यह भी बताना चाहिए कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उत्तराखंड की एक सामाजिक संस्था से जुड़े दलित युवाओं ने कथित धमकियों के चलते अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और थ्प्त् दर्ज कराई। राजनीतिक बयानबाजी के बाद पैदा हुए माहौल में यदि किसी दलित युवा को अपनी सुरक्षा को लेकर भय महसूस होता है, तो यह भी उतना ही गंभीर विषय है। कानून का सहारा लेना उनके अधिकार और सुरक्षा से जुड़ा कदम है।द्य
उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस जिस तरह हल्द्वानी को लेकर राजनीतिक माहौल बनाने में जुटी हैं, वे यह भी बताएं कि उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कथित तौर पर धमकियों का सामना कर रहे उन दलित युवाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि कांग्रेस वास्तव में दलितों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर है तो उसे इन युवाओं की चिंता पर भी सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए। दलित सुरक्षा का मुद्दा कांग्रेस के लिए केवल भाषण और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं हो सकता।
श्री भट्ट ने कहा कि खड़गे जी ने अनुच्छेद 17 और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम लिया है। कांग्रेस दूसरों को दलित विरोधी बताने से पहले अपने इतिहास के पन्ने पलट ले। 1952-54 में डॉ. आंबेडकर की चुनावी हार से लेकर 1990 में उन्हें भारत रत्न दिए जाने तक कांग्रेस यह बताए कि बाबासाहेब को वह सम्मान देने में इतनी देर क्यों हुई? आज आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस को अपने अतीत का जवाब भी देना चाहिए।




