
Date/07/08/2026
Chamoli/Uttarakhand prime 24×7
चमोली। पिंडर घाटी की लाइफलाइन माने जाने वाले ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग पर नारायणबगड़ से आगे आमसोड़ के पास पहाड़ी से विशाल चट्टान और भारी मलबा गिरने के कारण पिछले 35 घंटे से अधिक समय से यातायात पूरी तरह ठप है। इससे गढ़वाल और कुमाऊं के बीच आवागमन प्रभावित होने के साथ ही यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, इसी भूस्खलन से सिमली (कर्णप्रयाग) से नारायणबगड़, थराली और देवाल क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति देने वाली 33 केवी लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे पूरी पिंडर घाटी पिछले 35 घंटे से अंधेरे में डूबी हुई है। गुरुवार तड़के आमसोड़ के समीप पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरककर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गिरा। करीब 150 से 200 मीटर क्षेत्र में भारी मात्रा में मलबा, विशाल बोल्डर और पेड़ सड़क पर फैल गए, जिससे मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की मशीनें गुरुवार भर मार्ग खोलने में जुटी रहीं, लेकिन विशाल बोल्डरों और लगातार गिर रहे मलबे के कारण सफलता नहीं मिल सकी।
लगातार दूसरे दिन भी सड़क बंद रहने से गढ़वाल और कुमाऊं के बीच आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। यात्री घंटों तक फंसे रहे, जबकि स्थानीय लोगों को भी दैनिक जरूरतों और जरूरी कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और पहाड़ी से मलबा गिरना बंद हुआ तो शुक्रवार देर शाम तक मार्ग यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
भूस्खलन के कारण 132 33 केवी उपकेंद्र सिमली से आने वाली 33 केवी विद्युत लाइन के पांच पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इससे नारायणबगड़, थराली और देवाल सहित पूरी पिंडर घाटी की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से लोगों के इनवर्टर जवाब दे चुके हैं, मोबाइल फोन बंद हो गए हैं और बिजली आधारित अधिकांश उपकरण निष्क्रिय हो गए हैं।
ऊर्जा निगम के उपखंड अधिकारी (एसडीओ) अतुल कुमार ने बताया कि क्षतिग्रस्त पोलों के स्थान पर नए पोल और अन्य आवश्यक सामग्री आमसोड़ के निकट पहुंचा दी गई है। हालांकि सड़क बंद होने के कारण मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि मार्ग खुलते ही युद्धस्तर पर लाइन की मरम्मत कर विद्युत आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।




