
Date/28/07/2026
Mussoorie/Uttarakhand prime 24×7
मसूरी। मसूरी के समीपवर्ती त्याड़े पहाड़ी लगभग साढ़े आठ हजार फीट की ऊंचाई पर भगवान बलभद्र का मंदिर विराजमान है। प्रति वर्ष सावन माह में यहां पर भगवान बलभद्र की दूध, मक्खन, शिरनी व रोट से भगवान को भोग लगाया जाता है। मानसून के मौसम में ग्रामीणों के पशु ऊंचाई वाले स्थानों में चले जाते हैं जिसको डांडा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में एक राक्षस ग्रामीणों के पशुओं को खा जाता था। ग्रामीणों द्वारा भगवान बलभद्र से राक्षस से छुटकारा दिलाने का निवेदन किया गया तो उन्होंने ग्रामीणों को निराश नहीं किया और राक्षस को मार दिया। उसके बाद से आज तक ग्रामीण सावन के महीने में भगवान बलभद्र की सालाना पूजा करते हैं जिसको पुजौज कहा जाता है। प्रातः साढे आठ बजे जैद्वार मल्ला गांव स्थित भद्राज देवता के मंदिर से पूजा अर्चना के बाद पालकी को त्याड़े थान के लिए रवाना किया गया। त्याड़े मंदिर पहुंचने पर पूजा अर्चना करने के बाद ग्रामीणों ने भगवान की पालकी के दर्शन किए और परिवार तथा फसलों व पशुधन की सुरक्षा व संपन्नता की मनौतियां मांगी। इस अवसर पर अनेक पश्वाओं पर देव अवतरित हुए जिनको पारंपरिक वाद्यों द्वारा शांत किया गया। ग्रामीण महिलाओं व पुरूषों द्वारा अपने पारंपरिक लोक संस्कृति का प्रदर्शन किया गया ढोल दमाउ की थाप पर ग्रामीणों ने नृत्य किया। दोपहर बाद भगवान बलभद्र की पालकी जैद्वार मल्ला गांव लौटी। इस अवसर पर त्याड़े भद्राज मंदिर समिति के अध्यक्ष सुनील पंवार, दिनेश कैंतुरा, जिला पंचायत सदस्य जोतसिंह रावत, बिक्रम सिंह रावत, मनजीत सिंह रावत, सुनील रावत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।



