Date/31/05/2026
Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7
रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन धरती ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि सेवा, समर्पण और संघर्ष की राह पर चलने वालों को एक न एक दिन विश्व मंच पर सम्मान अवश्य मिलता है। जनपद रुद्रप्रयाग के स्वीली गांव के मूल निवासी, प्रख्यात समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं जनचेतना के प्रेरक व्यक्तित्व कृष्णानन्द डिमरी को सामाजिक सेवा, शिक्षा, जनजागरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया है।
नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में आइकॉनिक पीस अवार्ड काउंसिल (आईपीएसी) द्वारा उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि ने न केवल रुद्रप्रयाग बल्कि सम्पूर्ण उत्तराखण्ड को गौरवान्वित किया है। सम्मान की सूचना मिलते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने इसे समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताया।
डॉ. कृष्णानन्द डिमरी का जीवन समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने सदैव यह विश्वास किया कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि जागरूकता, शिक्षा, नैतिक मूल्यों और सामूहिक भागीदारी से संभव होता है।
इसी विचारधारा को आधार बनाकर उन्होंने वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया, सामाजिक सरोकारों को मजबूत किया और लोगों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का कार्य किया। उनके प्रयासों ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का काम किया है।
डॉ. डिमरी की पहचान केवल एक समाजसेवी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हजारों युवाओं और विद्यार्थियों के प्रेरणास्रोत भी हैं। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में संसाधनों की कमी से जूझ रहे विद्यार्थियों को उन्होंने निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया। शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम मानते हुए उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए अनेक प्रयास किए।
उनकी प्रेरणा से अनेक युवा आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश उन्होंने सदैव युवाओं को दिया है।
मानद डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त करने के बाद डॉ. कृष्णानन्द डिमरी ने विनम्रता के साथ कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जो समाज के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इसे अपनी उपलब्धि नहीं बल्कि समाज के प्रति बढ़ी हुई जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी उनका प्रयास रहेगा कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाई जा सके।
एक छोटे से पहाड़ी गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, सेवा भाव और निरंतर परिश्रम के बल पर डॉ. कृष्णानन्द डिमरी ने यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन और ईमानदार प्रयास किसी भी व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। उन्हें मिला यह सम्मान उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं। यह उपलब्धि बताती है कि समाज के लिए किया गया निस्वार्थ कार्य कभी अनदेखा नहीं जाता, बल्कि एक दिन वह वैश्विक पहचान का आधार बनता है।