बीकेटीसी के प्रस्तावों पर उठे गंभीर सवाल, आरटीआई से हुआ खुलासा – Uttarakhand Prime 24X7

बीकेटीसी के प्रस्तावों पर उठे गंभीर सवाल, आरटीआई से हुआ खुलासा

Date/25/03/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के हालिया प्रस्तावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विकेश सिंह नेगी ने आरोप लगाया है कि बीकेटीसी के वर्तमान बोर्ड द्वारा लिए गए कुछ निर्णय न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने वाले हैं, बल्कि धार्मिक स्थलों में व्यावसायिकता को भी बढ़ावा देने वाले प्रतीत होते हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए विकेश सिंह नेगी ने बताया कि उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत बीकेटीसी से वर्तमान बोर्ड के गठन के बाद आयोजित बैठकों का विस्तृत ब्योरा मांगा था। इसके जवाब में बीकेटीसी के लोक सूचना अधिकारी द्वारा 09 जुलाई 2025 को आयोजित बोर्ड बैठक के प्रस्तावों की छायाप्रति एवं शासन को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई गई। इन दस्तावेजों के अध्ययन के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिन पर सार्वजनिक बहस और समीक्षा की आवश्यकता है।

विकेश सिंह नेगी ने कहा कि बोर्ड बैठक में मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) पद की अर्हताओं में संशोधन का प्रस्ताव पारित किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 1985 की सेवा नियमावली में सीईओ पद के लिए मात्र स्नातक डिग्री की अर्हता निर्धारित थी, जबकि वर्ष 2023 में लागू नई सेवा नियमावली में इसे संशोधित करते हुए प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होना अनिवार्य किया गया था।

हालांकि, वर्तमान बोर्ड ने इस प्रावधान को “एकांगी” और “परिवर्तनशील व्यवस्था के अनुकूल नहीं” बताते हुए इसे हटाने की सिफारिश की है। विकेश सिंह नेगी ने इस तर्क को पूरी तरह अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि देश के अधिकांश प्रमुख श्राइन बोर्डोंकृजैसे वैष्णो देवी, तिरुपति बालाजी आदिकृमें सीईओ पद पर अनुभवी आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बीकेटीसी जैसा विश्व प्रतिष्ठित संस्थान, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, वहां प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की ढिलाई गंभीर परिणाम ला सकती है। विकेश सिंह नेगी ने कहा “यदि मात्र स्नातक डिग्री के आधार पर सीईओ की नियुक्ति की जाती है, तो इससे प्रबंधन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और पारदर्शिता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

विकेश सिंह नेगी ने आगे कहा कि वर्ष 2023 में बनाई गई सेवा नियमावली का उद्देश्य बीकेटीसी के प्रशासन को अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाना था। इसमें स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया था कि सीईओ पद पर नियुक्ति के लिए प्रशासनिक अनुभव के साथ प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि इस नियम के तहत ही वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों या आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित होती है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होती है। ऐसे में इस प्रावधान को हटाने का प्रयास संस्था की साख और कार्यप्रणाली दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

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