हरिद्वार में इलाज के दौरान लड़की की मौत, परिजनों ने किया हंगामा, निजी हॉस्पिटल सील – Uttarakhand Prime 24X7

हरिद्वार में इलाज के दौरान लड़की की मौत, परिजनों ने किया हंगामा, निजी हॉस्पिटल सील

दिनांक/24/08/2025

Haridwar/ Uttarakhandprime 24×7 

हरिद्वार। शहर के एक निजी हॉस्पिटल में 19 साल की लड़की की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने निजी हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर गंभीर आरोप जड़े हैं। लड़की की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सील कर दिया है। एसडीएम जितेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल को सील कर दिया गया है। साथ ही पांच मरीजों को दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया है। आगे की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीम बना दी है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि शुक्रवार को पेट दर्द की शिकायत पर लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि इंजेक्शन देने के बाद बच्ची की तबीयत खराब होने लगी और लड़की ने दम तोड़ दिया। लड़की की मौत के बाद डॉक्टर अस्पताल से फरार हो गए, परिजन अस्पताल के बाहर ही डटे रहे। परिजनों ने निजी हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।

घटना के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और गुस्साए लोगों ने हॉस्पिटल में जमकर तोड़फोड़ भी की। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे, किसी तरह लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया गया। साथ ही मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रही। वहीं घटना के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शुरुआती जांच में खामियां मिलने के बाद अस्पताल को सील किया है। वहीं सीएमओ ने पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं परिजन अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

परिजनों ने इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन की शिकायत सीएमओ से भी की है। जानकारी देते हुए हरिद्वार के एसडीएम जितेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल को सील कर दिया गया है। साथ ही वहां इलाज करा रहे पांच मरीजों को दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया है। आगे की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीम बना दी है। वहीं अस्पताल प्रबंधन से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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