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लेखक गाँव में स्थापित हुई एसटीईएम प्रयोगशाला, छात्रों में विज्ञान के प्रति बढ़ेगी जिज्ञासा

लेखक गाँव में स्थापित हुई एसटीईएम प्रयोगशाला, छात्रों में विज्ञान के प्रति बढ़ेगी जिज्ञासा

Date/25/04/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। देहरादून स्थित भारत के पहले “लेखक गाँव” में आज विज्ञान और सृजन का एक नया अध्याय जुड़ गया, जब उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एवं मैथमेटिक्स जिज्ञासा कक्ष एवं प्रयोगशाला” का विधिवत उद्घाटन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। तत्पश्चात छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी गई। अटल प्रेक्षागृह में आयोजित मुख्य समारोह में उपस्थित अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर “लेखक गाँव” एवं “विज्ञान धाम” पर आधारित प्रेरणादायक वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया गया, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह को इन अभिनव पहलों की विकास यात्रा और उद्देश्य से परिचित कराया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा लेखक गाँव में जिज्ञासा कक्ष का लोकार्पण किया गया।

लेखक गाँव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जिज्ञासा विज्ञान को जन्म देती है और नवाचार की दिशा में अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि “लेखक गाँव” में जिज्ञासा केवल प्रश्न नहीं, बल्कि सृजन का आधार बनेगी। मुख्य अतिथि, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि “लेखक गाँव” एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में विकसित हो रहा है, जहाँ प्रकृति और संस्कृति के सान्निध्य में ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान के नए आयाम सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने “जिज्ञासा कक्ष” को बच्चों के रचनात्मक और वैज्ञानिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि यूकास्ट की दूरदर्शिता इस पहल में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है, जो उत्तराखंड के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि एसटीईएम केवल विषयों का समूह नहीं, बल्कि सोचने, समझने और सृजन की एक समग्र प्रक्रिया है। “आज लेखक गाँव में साहित्य के साथ विज्ञान की एक नई धारा भी प्रवाहित हो रही है, जो ज्ञान के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।” उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए जिज्ञासा, चिंतन और नवाचार को भारत की वास्तविक शक्ति बताया।

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