
Date/17/05/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि समाज के उपेक्षित, वंचित और अभावग्रस्त वर्गों के उत्थान के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति मुख्यधारा से नहीं जुड़ता, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सेवा भारती इसी उद्देश्य को लेकर वर्षों से समाज के बीच सेवा कार्यों का विस्तार कर रही है। सेवा भारती देहरादून महानगर के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए डॉ. शैलेन्द्र ने यह बातें कही। उत्तरी महानगर अध्यक्ष सतीश डंगवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस मौके पर प्रांत प्रचारक डॉ शैलेंद्र ने कहा कि सेवा भारती के विभिन्न सेवा प्रकल्पों और संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और स्वावलंबन के माध्यम से सेवा भारती जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि संगठन अब विवाह संस्कार जैसे सामाजिक नवाचारों पर भी कार्य कर रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि जब समाज के सामने सेवा कार्यों के वास्तविक परिणाम दिखाई देते हैं तो लोग स्वयं आगे आकर सहयोग करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं और बहनें सेवा भारती सहित समाज के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं। सेवा कार्यों में उनकी सहभागिता समाज को नई दिशा देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सेवा और संवेदना के कार्यों से लोगों की सोच बदलती है और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।
डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि घुमंतू समाज, झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले परिवारों और अभावग्रस्त लोगों तक पहुंचना आज समय की आवश्यकता है। सेवा कार्य के लिए कोई सीमा या स्थान तय नहीं होता, जहां आवश्यकता होती है वहीं सेवा का दायित्व शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि सेवा भारती का पूरा कार्य समाज के सहयोग और सहभागिता से संचालित हो रहा है। समाज के सहयोग से ही संगठन निरंतर नए सेवा प्रकल्पों को आगे बढ़ा रहा है और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचा रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से उन्होंने सेवा कार्यों से जुड़ने और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में योगदान देने का आह्वान भी किया।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता सामूहिक चेतना और सेवा भाव है। हमारी संस्कृति केवल अपने तक सीमित नहीं रही, बल्कि पड़ोसी देशों के सहयोग की भावना भी भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है।




