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साहित्य अकादमी में ‘निशंक’ साहित्य पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, डॉ. निशंक हुए ‘कथा सम्राट सम्मान’ से अलंकृत

साहित्य अकादमी में ‘निशंक’ साहित्य पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, डॉ. निशंक हुए ‘कथा सम्राट सम्मान’ से अलंकृत

Date/17/05/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सभागार में हिमालय विरासत ट्रस्ट द्वारा डॉ निशंक की कहानियों पर केंद्रित साप्ताहिक कार्यक्रम “रविवारीय कहानी वार्ता” के तीन वर्ष (150 सप्ताह) पूर्ण होने पर आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह में डॉ निशंक को ‘कथा सम्राट सम्मान’ प्रदान किया गया और इस कार्यक्रम में वक्तव्य देने वाले विद्वानों को सम्मानित किया गया। वर्ष 2023 से प्रत्येक रविवार आयोजित हो रही यह ऑनलाइन साहित्यिक श्रृंखला हिंदी साहित्य में एक सशक्त सांस्कृतिक अभियान के रूप में स्थापित हो चुकी है, जिसके माध्यम से देश-विदेश के साहित्यकारों एवं हिंदी प्रेमियों ने डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कहानियों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं पुष्प गुच्छ भेंट के साथ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश ने कहा कि “रविवारीय कहानी वार्ता” ने साहित्यिक संवाद और वैचारिक आदान-प्रदान को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने कहा कि डॉ. निशंक की कहानियों में पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ वहाँ के संघर्ष, पीड़ा और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत सजीव चित्रण दिखाई देता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि साहित्य अकादमी के सचिव प्रो. वरुण कुमार गुलाटी ने कहा कि डॉ. निशंक के साहित्य पर 150 श्रृंखलाओं तक निरंतर चलने वाली यह साहित्यिक यात्रा अपने आप में अद्भुत और ऐतिहासिक है। 200वीं श्रृंखला पूर्ण होने पर साहित्य अकादमी स्वयं विशेष आयोजन करेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध कवि पद्मश्री अशोक चक्रधर ने डॉ. निशंक की चर्चित कहानी ‘विपदा जीवित है’ का पाठ किया और कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील एवं मर्मस्पर्शी कहानी है, जो पत्रकारिता के मूल धर्म और मानवीय दायित्व को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित करती है।

घ्घ्घ्घ् इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी साहित्यिक यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका लेखन जीवन संघर्षों और सामाजिक सरोकारों से उपजा है। उन्होंने सभी साहित्यकारों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए “रविवारीय कहानी वार्ता” को हिंदी साहित्य में संवाद और संवेदनाओं की सशक्त पहल बताया।

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