
Date/13/04/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून/रुड़की। भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने “भारत में पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर विकास के लिए आगे की राह” शीर्षक से एक व्यापक राष्ट्रीय स्तर की रिपोर्ट विकसित की है, जो दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण को सक्षम बनाने और देश के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्यों को समर्थन देने के लिए रणनीतिक मार्ग प्रस्तुत करती है। इस रिपोर्ट का औपचारिक विमोचन संतोष कुमार सारंगी, सचिव, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा किया गया, जिन्होंने भारत के ऊर्जा संक्रमण में पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर के रणनीतिक महत्व पर बल दिया।
संतोष कुमार सारंगी ने कहा, “पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को सक्षम बनाने और आने वाले वर्षों में ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जैसे-जैसे भारत अपने नेट ज़ीरो लक्ष्यों की ओर अग्रसर है, ऐसे साक्ष्य-आधारित अध्ययन नीति निर्माण, निवेश और क्रियान्वयन का मार्गदर्शन करने के लिए आवश्यक हैं। यह रिपोर्ट एक सुदृढ़, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा तंत्र के निर्माण के हमारे प्रयासों को मजबूत करने के लिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।” प्रो. अरुण कुमार के नेतृत्व में संचालित इस अध्ययन में भारत में पीएसपी के तीव्र विस्तार के लिए प्रमुख बाधाओं और सक्षम कारकों को संबोधित करते हुए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। यह रिपोर्ट पीएसपी अवसंरचना के विस्तार के लिए आवश्यक नीतिगत, विनियामक, वित्तीय और तकनीकी आयामों पर क्रियाशील अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। रिपोर्ट में प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई है, जिनमें नीतिगत और स्वीकृति से संबंधित बाधाएं, वित्तीय सीमाएं, भूमि एवं भू-वैज्ञानिक जटिलताएं, तथा निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी शामिल हैं। इसके साथ ही, यह रिपोर्ट लक्षित समाधान भी सुझाती है, जैसे कि स्वीकृति प्रक्रियाओं का सरलीकरण, नवोन्मेषी वित्तीय मॉडल, जोखिम आवंटन ढांचा, और संस्थागत समन्वय, ताकि परियोजनाओं का कुशलतापूर्वक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने अपने संदेश में भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए विज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर विश्वसनीय, विस्तार योग्य और सतत ऊर्जा प्रणालियों को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो न केवल राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन करेगा बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में भी योगदान देगा। घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने में पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों को सतत रूप से पूरा करने के लिए समन्वित नीतिगत समर्थन, हितधारकों के बीच तालमेल, और तीव्र क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। विशिष्ट प्रतिभागियों में मयंक तिवारी, अतिरिक्त सचिव, एमएनआरई; श्री आकाश त्रिपाठी, प्रबंध निदेशक, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड; और श्री मिन्हास आलम, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड शामिल थे। इनके साथ एमएनआरई और सीईए के वरिष्ठ अधिकारी, पीएसपी डेवलपर्स, उपकरण आपूर्तिकर्ता, सलाहकार, सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधि, सीपीएसयू एवं राज्य पीएसयू, प्रमुख परामर्श कंपनियां, वित्तीय संस्थान और प्रौद्योगिकी प्रदाता भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर बोलते हुए, प्रो. अरुण कुमार, आईआईटी रुड़की ने सचिव, एमएनआरई का रिपोर्ट के विमोचन के लिए सहर्ष सहमति प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट देशभर के विभिन्न पीएसपी हितधारकों के साथ समन्वय में विकसित की गई है और पीएसपी के आगे के अध्ययन एवं विकास के लिए एक आधार के रूप में कार्य कर सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत को उन पीएसपी प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास को बढ़ाने के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना चाहिए, जिन्हें अभी आयात किया जाता है।




