रूद्रप्रयाग के भुनाल गांव में भालू ने दो महिलाओं पर किया हमला – Uttarakhand Prime 24X7

रूद्रप्रयाग के भुनाल गांव में भालू ने दो महिलाओं पर किया हमला

दिनांक/06/09/2025

Rudraprayag/Uttarakhandprime 24×7 

रुद्रप्रयाग। जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्र भुनाल गांव की दो महिलाओं पर भालू ने हमला कर दिया। भालू के हमले से दोनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। महिलाओं के घायल होने की घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिसके बाद महिलाओं के उपचार के लिए उनका हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह भुनाल गांव की शशि देवी और बुरंशी देवी जंगल गई थीं। वहां भालू ने अचानक दोनों महिलाओं पर हमला कर दिया। इस हमले में बुरांसी देवी पत्नी स्व। मदन सिंह और शशि देवी पत्नी कुंवर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

भालू के हमले में दोनों महिलाओं के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे जख्म हो गए। जिससे भारी मात्रा में रक्तस्राव हुआ। स्थानीय लोगों ने तत्काल घटना की सूचना प्रशासनिक टीम को दी। जिस पर बक्सीर की मेडिकल टीम मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार किया।

प्राथमिक उपचार के तहत मरहम-पट्टी की गई। इस दौरान मेडिकल टीम ने शशि देवी की स्थिति को काफी गंभीर बताया। उन्होंने हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद दोनों महिलाओं को हेली सेवा के माध्यम से अगस्त्यमुनि लाया गया।

जहां से एंबुलेंस के माध्यम आए दोनों महिलाओं को जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में भर्ती किया गया। जहां दोनों महिलाओं का उपचार चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से भालू का आतंक बना हुआ है। उनका आरोप है कि वन विभाग को सूचित करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि दोनों महिलाओं को बक्सीर की मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया। जिसके बाद दोनों महिलाओं को हेलीकॉप्टर के माध्यम से अगस्त्यमुनि लाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों की टीम दोनों घायलों का इलाज कर रही है। इसके अलावा आपदा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

बता दें कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में आए दिन वन्यजीवों के हमले की घटनाएं सामने आ रही है। जिसमें कई लोग घायल तो कई लोग जान भी गंवा रहे हैं। सबसे ज्यादा हमले महिलाओं पर हो रहा है, क्योंकि, वे ही चारा पत्ती, घास, जलावन लकड़ी लेने या मवेशी चुगाने जंगल जाती हैं। जहां उन पर वन्यजीव हमला कर देते हैं।

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