

देहरादून /उत्तराखण्ड प्राइम 30/07/23। आज कल एक वीडियो सोसल मीडिया पर काफी चल रही है की हमारी मित्र पुलिस ने अपने थाने मैं ही युवकों की पिटाई करी और काफी चोट आई इसी की पड़ताल करते हुए जब हम क्लेमेन्टटाउन थाने देहरादून उत्तराखंड पहुंचे तब हमें सिक्के के दूसरे पहलू का पता लगा कि किस तरह युवकों ने दूसरे पक्ष की पिटाई करी तब हमारी पुलिस ने उनको बचाने का प्रयास किया उसके पश्चात प्रथम पक्ष में पुलिस के ऊपर भी हाथापाई शुरू करते हैं अपने बचाव करने के लिए पुलिस ने युवकों को पकड़ा।

ये घटना एक जुलाई की है जब एक मकान मालिक बाप व तीन बेटों द्वारा थाना परिसर में ही किराएदार कॉलेज छात्रो से हाथापाई करने के बाद थाने के अंदर आकर थानाध्यक्ष शिशुपाल व अन्य पुलिस कर्मियों से भी गाली गलौच व मारपीट करने के प्रतिउत्तर मे उक्त वक़्त थानाध्यक्ष द्वारा कानून व्यवस्था बनाने को आरोपी बाप बेटों को हिरासत में लेकर उनपर आईपीसी धारा 332, 333, 307, 504, 506, 354 के तहत मामला पंजीकृत करने सहित एक किरायेदार की तहरीर पर भी चारों के खिलाफ आईपीसी धारा 323, 504, 506, 307, 341, 427 में भी मुकदमा पंजीकृत किया था। किंतु इसके बाद से ही पुलिस पर ही उक्त छात्रो के साथ मिलकर मकान मालिक बाप बेटों को फसाने के आरोप लगे थे। जबकि उक्त पिता पुत्रो द्वारा थाना परिसर में ही कानून व्यवस्था बिगड़ते हुए मारपीट की गई। इस कारण पोलिस ने कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उक्त बाप बेटो पर कार्यवाही की थी। यह देख सोच बनती है कि कितना आसान है पुलिस पर आरोप लगाना!

गौरतलब है कि बीती जुलाई में क्लेमेन्टटाउन अंतर्गत सुसायटी एरिया निकट सेंट मैरी चौक, सुभाष नगर में एक किराए के मकान में रहने के दौरान हुई तोड़फोड़ को लेकर मकान मालिक धन सिंह फर्त्याल व उसके तीन पुत्रो विनय फर्त्याल,अरूण फर्त्याल व वरूण फर्त्याल के खिलाफ किरायेदारों चक्षु अग्रवाल पुत्र अतुल कुमार अग्रवाल,खुशहाल शहगल पुत्र संजीव सहगल निवासी- जयपुर,राजस्थान,जोकि बीएसी प्रथम वर्ष ग्राफिक एरा के छात्र है, के द्वारा थाना क्लेमेन्ट टाउन में आकर शिकायत दर्ज करवाई गई कि मकान मालिक व उनके पुत्रो द्वारा तोड़फोड़ को लेकर उनसे मारपीट की गई व गाली गलौच की गई है,

जिसपर थाना मुंशी द्वारा छात्रो व मकान मालिकों के बीच सुलह करवा दी थी व छात्रो द्वारा पुलिस के सामने मकान मालिकों को तोड़फोड़ ठीक करने को उनकी तरफ से पैसे भरने को हामी भरी थी। जिसके बाद पुलिस द्वारा उन दोनों को घर जाने को बोल दिया था।किन्तु पिता पुत्रो द्वारा थाना परिसर के गेट पर ही उक्त छात्रो से मारपीट शुरू कर दी गयी जिसपर वह छात्र दौड़कर थाना परिसर में आ गए और पीछे पीछे उक्त पिता पुत्र भी उन छात्रो को मारने थाने में आ गए,जिससे बीच बचाव करने आये थानाध्यक्ष क्लेमेन्टटाउन शिशुपाल राणा व उनके कर्मी बीच बचाव करने आये तो उक्त पिता पुत्रो ने थानाध्यक्ष से भी गाली गलौच व मारपीट की। इस घटना में उक्त पिता पुत्रो द्वारा कानून के अनुपालक द्वारा सुलह करवाने के बावजूद कानून व्यवस्था को हाथ मे लेकर कानून तोड़ा व पुलिस कर्मियों के सामने ही छात्रो से मारपीट, उनपर रौब दिखाना, उन्ही की सुरक्षा में ड्यूटी करते पुलिस कर्मियों पर ही हाथ उठाना कहाँ तक जायज था,जबकि पुलिस द्वारा उन दोनों को लगातार समझाया जा रहा था किंतु उसके बावजूद भी कानून पर ही हाथ उठाने के खिलाफ कोई जायज कदम तो नही था। उक्त आरोपी पिता पुत्रो के थाना परिसर में उक्त रवैये से सवाल उठता है जब उन्होंने पुलिस के सामने छात्रो से मारपीट की तो क्या उन्होंने घर पर छात्रो से मारपीट नही की होगी, यह कैसे कहा जाए? थानाध्यक्ष के रूप में शिशुपाल राणा का उक्त समय प्रथम दायित्व था कि बिगड़ी व्यवस्था को ठीक करना,ख़ाकीधारक व ऑथिरिटी में होते हुए एक थानाध्यक्ष को क्या करना चाहिए उन्होंने उसके अनुरूप घटना में प्रतिउत्तर देते हुए आरोपियों पर कार्यवाही करते हुए उनपर मुकदमा दर्ज किया। जिसके बाद से उनपर पक्षपात के आरोप लगे जिसमे पुलिस टीम द्वारा फिर भी न्यायोचित तरीके से मामले में जांच की जिसमे आरोपी पिता पुत्रो द्वारा छात्रो को तोड़फोड़ के मामले में फ़ोन में धमकाए जाने के साक्ष्य मिले है।जिसपर पुलिस द्वारा विवाकाधीन होकर आगे कार्यवाही की जा रही है। और इसके ही थानाध्यक्ष शिशुपाल राणा अपनी कार्यप्रणाली में सदैव ही उत्तम व कर्तव्यपरायण अधिकारियों में माने जाते है। किन्तु उक्त दिन की उस घटना से आम जनता को खुद सोचना चाहिए कि पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही पर सवाल उठाना सही है?




