
Date/27/09/2026
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मसूरी। आर्य समाज का तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव हवन, पूर्णाहुति और ऋषि लंगर के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर प्रातः गायत्री यज्ञ, भजन, प्रवचन और पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। इसके बाद ऋषि लंगर आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर प्रखर वक्ता आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज वेदों के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करने वाली संस्था है। उन्होंने कहा कि वेदों में ज्ञान-विज्ञान की व्यापक परंपरा निहित है। महाभारत काल तक वैदिक संस्कृति के प्रभाव के बाद विभिन्न मत-मतांतर विकसित हुए। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना समाज सुधार, छुआछूत दूर करने और सामाजिक समरसता के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में भी आर्य समाज से जुड़े अनेक लोगों ने योगदान दिया। उन्होंने आर्य समाज को राष्ट्रवादी और धार्मिक संगठन बताते हुए वेदों के प्रचार-प्रसार को इसकी प्रमुख गतिविधि बताया।
द्रोण आर्ष गुरुकुल की पूर्व आचार्या डॉ. अन्नपूर्णा ने कहा कि यज्ञ को केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यज्ञ को भारतीय परंपरा और संस्कारों से जोड़ते हुए कहा कि इससे वातावरण की शुद्धता और मानसिक शांति की भावना को बढ़ावा मिलता है। आर्य समाज के अध्यक्ष आनंद रस्तोगी ने कहा कि तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दौरान भजन-कीर्तन और व्याख्यान आयोजित किए गए। समापन अवसर पर ऋषि लंगर का आयोजन किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष आनंद रस्तोगी, सचिव प्रणव साहनी, संजय अग्रवाल, सतीश कुमार, अनुराग रस्तोगी, डॉ. अजय अग्रवाल, नीलम नागिया, साधना साहनी, रजत अग्रवाल, योगिता गोयल, मनीष गोयल, सुदेश सैनी, विजय प्रकाश, रंजना रस्तोगी, राजेश नागिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।




