पिथौरागढ़ में घायल महिला को डोली में उठाकर 5 किमी चले ग्रामीण – Uttarakhand Prime 24X7

पिथौरागढ़ में घायल महिला को डोली में उठाकर 5 किमी चले ग्रामीण

दिनांक/12/08/2025

Pithoragarh/Uttarakhandprime 24×7 

पिथौरागढ़। सीमांत जिला पिथौरागढ़ जहां एक ओर आपदा की मार झेल रहा है तो वहीं दूसरी ओर पहाड़ जैसी मुसीबत भी झेल रहा है। मदकोट क्षेत्र में सड़क, संचार और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अब भी भारी अभाव है। इसी का जीता-जागता उदाहरण हाल ही में गोल्फा गांव में देखने को मिला। जहां घास काटते समय घायल हुई महिला को ग्रामीणों ने 5 किलोमीटर तक डोली में उठाकर सड़क तक पहुंचाया। जिसके बाद ही इलाज नसीब हो पाई।

जानकारी के मुताबिक, पिथौरागढ़ के गोल्फा गांव की खिला देवी पत्नी लक्ष्मण सिंह कोरंगा (उम्र 65 वर्ष) मवेशियों के लिए घास लेने जंगल गई थी। जहां घास काटते वक्त गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। सड़क से गांव की दूरी 5 किमी होने और पैदल खड़ंजा मार्ग होने के कारण किसी वाहन की पहुंच वहां संभव नहीं था। ऐसे में गांव के युवाओं ने चादर और लकड़ी के डंडों से एक अस्थायी डोली तैयार की। जिसके जरिए घायल महिला को कंधों पर लादकर सड़क तक लाए।

वहां से टैक्सी कर महिला को 120 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल भेजा गया। ग्राम प्रधान मुकेश सिंह और सरपंच डिगर सिंह ने बताया कि सड़क, संचार और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन बना हुआ है। लंबे समय से ग्रामीण सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की नहीं सुनी जा रही है।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तालिया ने बताया कि गोल्फा गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग पिछले एक दशक से लगातार उठाई जा रही है, लेकिन इस और सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिस कारण आए दिन ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में नल के कनेक्शन तो दे दिए गए हैं, लेकिन पानी नहीं आता है।

इसके अलावा संचार सेवा की हालत ये है कि ग्रामीणों को सिग्नल के लिए ऊंची पहाड़ियों पर जाना पड़ता है। जबकि, निजी कंपनियों के टावर क्षेत्र में मौजूद हैं। गोल्फा, तोमिक और बोना जैसे गांवों की करीब 2 हजार की आबादी सालों से इन समस्याओं से जूझ रही है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई, लेकिन समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि अगर जल्द ही समाधान नहीं मिला तो वे जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। उधर, ग्रामीणों की समस्या पर अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बात कही है।

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