
Date/14/07/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा राष्ट्र सेवा के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज नाबार्ड, उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून में 45वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत थे। समारोह में भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक हर्ष कुमार गौतम, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधि, उत्तराखण्ड ग्रामीण बैंक एवं सहकारी बैंकों के प्रतिनिधि, कृषक उत्पादक संगठन, स्वयं सहायता समूह, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, नाबार्ड के सेवानिवृत्त अधिकारी तथा अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके उपरांत “ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं द्वारा जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह में वृद्धि” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण वित्त, कृषि ऋण, वित्तीय समावेशन एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर नाबार्ड की 45 वर्षों की विकास यात्रा तथा उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय की वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई।
अपने संबोधन में डॉ. धन सिंह रावत ने नाबार्ड को 45वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नाबार्ड ने पिछले 45 वर्षों में कृषि, ग्रामीण विकास तथा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, आधारभूत संरचना विकास तथा सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से नाबार्ड ने सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। उन्होंने कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, सामूहिक विपणन को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में नाबार्ड की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से सहकारी बैंकों को मोबाइल बैंकिंग वैन उपलब्ध कराई गई हैं तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की बैंकिंग सेवाओं को कोर बैंकिंग समाधान (ब्ठै) के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुँच और बेहतर हुई है।
पंकज यादव, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ वर्ष रहा। इस दौरान राज्य में 5,061 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। सहकारी बैंकों एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को 4,179 करोड़ का पुनर्वित्त उपलब्ध कराया गया तथा ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अंतर्गत 743 करोड़ की स्वीकृति एवं 754 करोड़ का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवर्तन का एक सशक्त विकास भागीदार है। उन्होंने सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण, च्।ब्ै के कम्प्यूटरीकरण, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, कृषक उत्पादक संगठनों, जलवायु-अनुकूल कृषि, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण पर्यटन एवं स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि नाबार्ड का उद्देश्य समृद्ध किसान, सशक्त सहकारिता और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
इस अवसर पर हर्ष कुमार गौतम, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के समक्ष युवाओं का पलायन एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड कृषि, ग्रामीण उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों तथा जीआई उत्पादों के माध्यम से स्थानीय आजीविका आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के अवसर सृजित कर रहा है, जिससे पलायन रोकने में सहायता मिल रही है। उन्होंने ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय तथा संस्थागत कृषि ऋण के विस्तार पर भी बल दिया।




