देहरादून में कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी सघन निगरानी – Uttarakhand Prime 24X7

देहरादून में कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी सघन निगरानी

Date/09/10/2026

Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चैहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान जनपद में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और लिंगानुपात में सुधार को लेकर गंभीर मंथन किया गया। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चैहान ने कम लिंगानुपात वाले गांवों को चिह्नित कर रेड जोन बनाने, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित निगरानी करने तथा भ्रूण के लिंग की जांच कराने और करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने जनपद में लिंगानुपात की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों में उत्तराखंड का लिंगानुपात 939 के मुकाबले देहरादून का लिंगानुपात 927 पाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के लिंगानुपात संबंधी आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया जाए और असामान्य स्थिति वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जनपद के सभी 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने तथा गर्भवती महिलाओं की प्रभावी ट्रैकिंग के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कन्या भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के विरुद्ध अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

मानकों के अनुरूप होने पर ही मिलेगा नया पंजीकरण-डीएम

बैठक में 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण तथा 18 केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पंजीकरण और नवीनीकरण से पहले उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की अनापत्ति, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण पत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण संबंधी अनुबंध की अनिवार्य रूप से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानक पूरे करने वाले केंद्रों को ही अनुमति दी जाए तथा आवश्यक अभिलेखों के अभाव में किसी भी केंद्र का पंजीकरण या नवीनीकरण न किया जाए।

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