
Date/06/05/2026
Dehradun/ Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर ने चेयरपर्सन तृप्ति बहल के नेतृत्व में अपने बहुचर्चित वार्षिक कला सम्मेलन ‘अनबाउंड एक्सप्रेशंस ब्रेकिंग बैरियर्स आर्ट’ का समापन होटल इंदरलोक में आयोजित एक विचारोत्तेजक समारोह के साथ किया। 26 अप्रैल से प्रारंभ हुई इस दस दिवसीय प्रदर्शनी में क्षेत्रभर की महिला कलाकारों और फोटोग्राफर्स ने भाग लिया। समापन अवसर पर “क्यूरेटिंग फॉर स्पेसेजरू हाउ आर्टिस्ट्स कैन कैटर टू इवॉल्विंग डिजाइन एस्थेटिक्स” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कला विविधता को प्रोत्साहित करने और सार्थक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस कला सम्मेलन में कला प्रेमियों, डिजाइनर्स, आर्किटेक्ट्स और रचनात्मक समुदाय के लोगों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
कार्यक्रम की शुरुआत फ्लो नेशनल लीड विजुअल आर्ट्स कुँवररानी रितु सिंह के ऑनलाइन संबोधन से हुई। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उत्तराखंड चैप्टर को बधाई देते हुए चेयरपर्सन तृप्ति बहल एवं उनकी टीम की सराहना की।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि फिक्की फ्लो की राष्ट्रीय पूर्व अध्यक्ष, प्रख्यात लेखिका, नाटककार एवं कलाकार डॉ. कुसुम अंसल रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कला सीमाओं से परे जाकर लोगों को भावनाओं, संस्कृति और जीवन अनुभवों के माध्यम से जोड़ने की क्षमता रखती है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच कलाकारों, डिजाइनर्स और समाज को एक साथ लाकर रचनात्मकता का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान करता है।
पैनल चर्चा का संचालन फिक्की फ्लो उत्तराखंड की पूर्व चेयरपर्सन कोमल बत्रा ने किया। चर्चा में कला, वास्तुकला, हॉस्पिटैलिटी और डिजाइन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। पैनल में इन जॉय लिविंग की फाउंडर क्यूरेटर निशा सहाय, सागर डिजाइन ग्रुप के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट सागर नागपाल, ओप्युलेंस बाय आंचल की डिजाइन इंजीनियर आंचल बी पाठक तथा पिलिभीत हाउस, आईएचसीएल सेलेक्शंस, हरिद्वार के जनरल मैनेजर मयंक मित्तल शामिल रहे।
चर्चा के दौरान मयंक मित्तल ने हॉस्पिटैलिटी स्पेसेज में कला और सांस्कृतिक कथाओं के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उत्तराखंड आने के बाद पारंपरिक ऐपण कला से प्रभावित होने का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक ऐपण कलाकार को होटल में अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा कि मेहमानों ने इन कलाकृतियों को इतना पसंद किया कि कई लोगों ने कलाकार की पेंटिंग्स भी खरीदीं, जो स्वदेशी कला रूपों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
आंचल बी पाठक ने डिजाइन में भावनात्मक और संदर्भगत समझ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक स्थान की अपनी विशिष्ट पहचान होती है और कलाकारों को उस स्थान की आत्मा से जुड़कर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज डिजाइन केवल सजावट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कलाकारों, आर्किटेक्ट्स और डिजाइनर्स को सामग्रियों, टेक्सचर्स और कलात्मक तत्वों का संतुलित समावेश करते हुए अर्थपूर्ण स्पेस तैयार करने चाहिए।




