उत्तराखण्ड में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने की बैठक – Uttarakhand Prime 24X7

उत्तराखण्ड में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने की बैठक

Date/27/08/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को नई गति देने और राज्य के पर्यटन स्थलों को वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन के साथ बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए नए डेस्टिनेशन, नए पर्यटन उत्पाद और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सके। बैठक में राज्य में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं, नए पर्यटन स्थलों के विकास तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को केवल कुछ पारंपरिक एवं अधिक पर्यटक दबाव वाले स्थलों तक सीमित न रखते हुए नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल एवं मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए नए एवं कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रचारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन से जुड़े स्टैक होल्डर्स सहित संबंधित विभागों से इनपुट लेकर राज्यभर में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए। प्रत्येक संभावित डेस्टिनेशन की विशेषता और यूएसपी निर्धारित करते हुए वहां उपयुक्त पर्यटन उत्पाद एवं गतिविधियां विकसित की जाएं। उन्होंने नए ट्रैकिंग रूट्स विकसित करते हुए, हाई-अल्टीट्यूड मैराथन, बर्ड वॉचिंग, नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स एवं स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि पर्यटन से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

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