युवा चेतना, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति संरक्षण के समन्वय से बनेगा विकसित उत्तराखंड  – Uttarakhand Prime 24X7

युवा चेतना, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति संरक्षण के समन्वय से बनेगा विकसित उत्तराखंड 

Date/28/10/2026 

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। लेखक गाँव, थानों में आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सवदृ2026 के चतुर्थ दिवस पर ‘युवा उत्तराखंड रू नई सोच, नई चेतना’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रदेश के भविष्य, युवा नेतृत्व, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की प्रगति का मार्ग युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव के समन्वय से प्रशस्त होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार के लोकसभा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत रहे। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी तथा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विचार व्यक्त किए। लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने अतिथियों का स्वागत किया।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और उसके भविष्य की दिशा तय करने वाली पीढ़ी हैं। सकारात्मक सोच, नवाचार और परिश्रम के साथ उत्तराखंड का युवा प्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियों और प्राकृतिक संपदा में रोजगार एवं उद्यमिता की व्यापक संभावनाएँ हैं। स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए आजीविका के अवसर सृजित किए जाने चाहिए। अल्मोड़ा के युवाओं द्वारा फ्लाइंग कार के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रदेश की युवा प्रतिभा और तकनीकी नवाचार की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने संस्कृति को समाज को जोड़ने वाली शक्ति बताते हुए युवाओं से अपनी जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति श्री पृथ्वीराज सिंह रूपन ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लेखक गाँव को युवाओं के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास और अंतरराष्ट्रीय संवाद का महत्त्वपूर्ण मंच बताते हुए महोत्सव की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी ने कहा कि विकास की सार्थकता आर्थिक प्रगति के साथ संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण में निहित है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकालों का उल्लेख करते हुए प्रदेश की विकास यात्रा पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य और संस्कृति मनुष्य, विज्ञान तथा प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *