लेजर तकनीक से जीवंत हुई रामलीला, ‘गंगा-जमुना दिवस’ पर दिया हिमालय और नदियों को बचाने का संदेश – Uttarakhand Prime 24X7

लेजर तकनीक से जीवंत हुई रामलीला, ‘गंगा-जमुना दिवस’ पर दिया हिमालय और नदियों को बचाने का संदेश

Date/18/10/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा आयोजित उत्तराखंड की ऐतिहासिक भव्य रामलीला महोत्सव के सातवें दिवस को ‘गंगा-जमुना दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी का मिलाप, बाली वध तथा मेघनाद और हनुमान जी के बीच संवाद के रोमांचक प्रसंग प्रस्तुत किए गए। आधुनिक लेजर तकनीक के माध्यम से मेघनाद द्वारा हनुमान जी को नागपाश में बांधने का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, डिजिटल तकनीक से लंका दहन के भव्य मंचन ने दर्शकों को आकर्षित किया। डिजिटल स्क्रीन, लेजर इफेक्ट्स और ध्वनि तकनीक के माध्यम से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में टिहरी से तीन बार के विधायक किशोर उपाध्याय उपस्थित रहे।

‘गंगा-जमुना दिवस’ के माध्यम से समिति ने नदियों, हिमालय और प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। गंगा और यमुना केवल नदियां नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, आस्था और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं। हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना, जलवायु परिवर्तन और नदियों में बढ़ता प्रदूषण गंभीर चिंता के विषय हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने हेतु हिमालयी ग्लेशियरों, नदी स्रोतों और जलधाराओं का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्य अतिथि टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय जी ने कहा कि श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करना एक बहुत बड़ा भगीरथ कार्य है। इस ऐतिहासिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए समिति और उसके अध्यक्ष अभिनव थापर का प्रयास सराहनीय है। भव्य लेजर तकनीक के बीच हनुमान जी को नागपाश में बाँधने जैसे प्रसंगों का जीवंत मंचन पारंपरिक रामलीला और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है। ‘गंगा-जमुना दिवस’ के माध्यम से गंगा, यमुना, हिमालय और ग्लेशियरों के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाना भी आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

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