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अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ः गणेश गोदियाल

अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ः गणेश गोदियाल

Date/17/09/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ हरक सिंह रावत ने संयुक्त रूप से संबोधित किया, पत्रकार बंधुओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नरेंद्र मोदी द्वारा अपने जनदिवस के अवसर पर दीपोत्सव मनाने पर तीखा हमला बोला उन्होंने कहा कि जिस देश में महंगाई चरम पर है आम आदमी के घर में दो वक्त का चूल्हा भी जलना मुश्किल हो रहा है उस समय मोदी जी के लिए डीप जलाने और अपने आपको उनका सच्चा भक्त दिखाने के होड़ लगी हुई है और हजारो टन तेल की आहुति देने को नेता तैयार हैं अगर ये दीपक देश की जानता उनके कामो से खुश होकर जलाती तो बात अलग थी,उन्होंने कहा की देश के युवाओं के साथ छल करने का काम इस देश के प्रधानमंत्री ने किया है,उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली योजना है।

देश के लाखों युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर भर्ती की तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है। युवा 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में प्रवेश करता है और चार वर्ष बाद लगभग 21-22 वर्ष की उम्र में उसे दोबारा रोजगार की तलाश करनी पड़ सकती है। कांग्रेस का सवाल है कि इतने कम समय में युवा अपने परिवार और भविष्य को किस प्रकार सुरक्षित करेगा?स्थायी सैनिक और अग्निवीर में असमानता का सवाल बहुत महत्वपूर्ण है,

जब दोनों देश की सुरक्षा के लिए समान जोखिम उठाते हैं, तो सेवा की अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के मामले में इतना बड़ा अंतर क्यों? सेना केवल नौकरी नहीं, जीवनभर की जिम्मेदारी और सम्मान है। सैनिक को केवल चार वर्ष के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी मानना उचित नहीं। सेना में अनुभव, अनुशासन और विशेषज्ञता वर्षों की सेवा से विकसित होती है।

पत्रकार बंधुओं को संबोधित करते हुए प्रीतम सिंह ने कहा की अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है,उत्तराखंड की सैन्य परंपरा अत्यंत गौरवशाली रही है। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवार सेना में रोजगार को पीढ़ियों से अपनी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते रहे हैं। अग्निवीर व्यवस्था का उत्तराखंड के युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। आज देश में बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिनाई के बीच युवा वर्षों तक तैयारी करता है। चार वर्ष की सेवा के बाद फिर से रोजगार की दौड़ में लौटना उसके लिए गंभीर चुनौती है। पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले सैनिकों और चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त एवं दीर्घकालिक व्यवस्था क्या है? योजना की सबसे बड़ी चिंता यही है कि नियमित सेवा में सीमित संख्या में युवाओं के चयन के बाद शेष युवाओं के लिए रोजगार का स्थायी रोडमैप क्या है। सरकार स्पष्ट करेकृसेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए कितनी स्थायी नौकरियां सुनिश्चित कैसे होगी। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ हरक सिंह रावत ने कहा की केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण अथवा प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस सरकार से वास्तविक नियुक्तियों का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग करे। उन्होंने कहा की उत्तराखंड एक सैन्य बाहुल्य राज्य है यहाँ हर घर में एक सैनिक है जब यहाँ कोई शहीद होता है तो उसकी माता पिता बहन सब गौरवान्वित महसूस करते हैं अग्निवीर योजना देश के और प्रदेश के युवाओं की भावनाओं के साथ खेलने जैसा है,सेना की भर्ती को रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम न बनाया जाए।

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