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रक्तदाता देवदूत से कम नहींः रितु डोभाल

डॉ. अनिल वर्मा को डॉ. कार्ल लैंडस्टीनर रक्तदान क्रांतिवीर अवार्ड से नवाजा

Date/27/06/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, कौशल विकास, आजीविका एवं पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से समाज कल्याण में अग्रणी संस्था वीरा फाउंडेशन द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष में रक्त संचरण के जनक डॉ. कार्लस्टीनर की स्मृति में शिमला बाईपास स्थित कार्यालय में एक रक्तदान जागरूकता संगोष्ठी व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता रक्तदाता शिरोमणि डॉ. अनिल वर्मा, रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा कार्लस्टीनर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सन 1900 -1901 में उन्होंने आधुनिक चिकित्सा की महानतम खोजों में से एक रक्त संचरण में ए बी ओ ब्लड ग्रुपों का अविष्कार करके क्रांति कर दी थी। इसके कुछ समय बाद ही उनके सहयोगियों ने ष्ए बीष् ब्लड ग्रुप की। सन 1940 में डॉ. लैंडस्टीनर एवं डॉ. अलेक्जेन्डर वीनर ने मिलकर आरएच फैक्टर की खोज करके महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और रक्ताधान में होने वाली जटिलताओं को रोकने में मदद की।

चिकित्सा जगत में इस अति विशिष्ट उपलब्धि जिसके फलस्वरूप रक्तदाता विश्व भर में प्रतिदिन अनगिनत लोगों की जान बचा रहे थे, इसे दृष्टिगत रखते हुए डॉ. कार्ल लैंडस्टीनर को सन 1930 में रक्त को ही ट्रान्सफ्यूजन मेडिसिन के रूप में खोजने के लिए विश्व के सर्वोच्च पुरस्कार नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। विश्व भर में आज करोड़ों लोग इस रक्त औषधि के कारण जिन्दा हैं, बल्कि प्रतिदिन लाखों लोगों की जान बचाई जाती है। अतः हमें ना केवल स्वेच्छापूर्वक स्वयं रक्तदान करना चाहिए बल्कि अपने परिवार और मित्रों को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। मैंने स्वयं अब तक 155 से अधिक बार रक्तदान किया है बल्कि सौ से अधिक रक्तदान शिविर, दस हजार से ज्यादा रक्तदान तथा एक लाख से अधिक युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर रक्तदान हेतु प्रेरित किया है। इसके अतिरिक्त विगत 55 वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर लगातार विभिन्न स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट -गाइड, रेडक्रॉस तथा एफबीडीओ आई के माध्यम से एनीमिया, थैलासेमिया रक्तदान जागरूकता अभियान चला रहे हैं। डॉ. वर्मा ने कहा कि उनके जीवन का उद्देश्य है कि कोई भी मरीज रक्त के अभाव में ना मरे और कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान किये बिना ना मरे।

इतना ही नहीं उन्होंने अपना और धर्मपत्नी का दधीचि देहदान समिति में नेत्रदान, अंगदान तथा सम्पूर्ण देहदान संकल्प का रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है। इसमें मृत्यु के उपरांत नेत्रदान श्री महंत इन्द्रेश हॉस्पिटल के लिए तथा सम्पूर्ण शरीर का दान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून के लिए किया गया है।

इससे पूर्व यूथ रेडक्रॉस सोसाइटी के रक्तदाता शिरोमणि डॉ. अनिल वर्मा को 155 बार रक्तदान करने तथा नेत्रदान सहित सम्पूर्ण देहदान संकल्प के लिए डॉ कार्ल लैंडस्टीनर रक्तदान क्रांतिवीर अवार्डष् प्रदान करके सम्मानित किया।

वीरा फाउंडेशन की सीईओ रितु डोभाल ने कहा कि रक्तदान जीवनदान है। किसी भी अस्पताल में रक्त की कमी के कारण बहुत से मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।अन्य दवाइयों के तो अक्सर अनेक विकल्प मौजूद होते हैं परन्तु रक्त का कोई विकल्प अभी तक नहीं है। जब मरीज की उम्मीदें केवल और केवल किसी रक्तदानी का रक्त मिलने पर ही टिकी हों तो रक्तदानी उसके लिए देवदूत से कम नहीं होता।अतः हमें दूसरों के दुःख को समझना चाहिए और इस पूजा समान रक्तदान को अपनाना चाहिए।

फाउंडेशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर विनोद डोभाल डोभाल ने बताया कि उनकी संस्था रक्तदान को समाज सेवा का सर्वोत्तम माध्यम मानती है। एक व्यक्ति का रक्त कम्पोनेंट थेरेपी के कारण 3-4 लोगों की जान बचा सकता है। हम लगातार छोटे – छोटे रक्तदान शिविर आयोजित करते रहते हैं ताकि ब्लड बैंकों को रक्त की आपूर्ति होती रहे। अब तक हम 35 शिविर लगा चुके हैं।

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