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सिटी फॉरेस्ट, कालसी घाट, आमवाला तरला से धौलास आवासीय योजना तक एमडीडीए उपाध्यक्ष का मैराथन निरीक्षण

प्रधानमंत्री मोदी के ‘सूर्य घर’ और हरित ऊर्जा अभियान को बढ़ावा, सिटी फॉरेस्ट पार्क में सोलर प्लांट बना मिसाल

Date/17/06/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सुशासन, पर्यावरण संरक्षण और नियोजित शहरी विकास के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने विकास कार्यों की रफ्तार तेज कर दी है। बुधवार को प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों के साथ विभिन्न विकास परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और स्पष्ट संदेश दिया कि गुणवत्ता, समयबद्धता और जनहित से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान हरित विकास, आधुनिक सुविधाओं, ऊर्जा संरक्षण, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया।

सिटी फॉरेस्ट बनेगा प्रकृति और आधुनिकता का संगम

सहस्त्रधारा रोड स्थित सिटी फॉरेस्ट का निरीक्षण करते हुए उपाध्यक्ष ने इसे उत्तराखंड के सबसे आकर्षक शहरी पार्कों में विकसित करने का खाका सामने रखा। उन्होंने पुराने ट्री हाउस का नवीनीकरण, पैदल मार्गों के दोनों ओर बारहमासी रंग-बिरंगे फूलों का रोपण, नदी किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए बांस के पौधे लगाने, लोटस फाउंटेन विकसित करने और भारत माता मंदिर के निर्माण के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि पार्क में स्थापित 120 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र बिजली खर्च में लगभग 90 प्रतिशत तक की बचत कर रहा है, जिसे हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।

जुलाई से आमवाला तरला आवासीय योजना में मिलेगा आशियाना

रिकॉर्ड समय में तैयार की गई आमवाला तरला आवासीय योजना का निरीक्षण करते हुए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को जुलाई माह से लाभार्थियों को कब्जा सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। परिसर में उन्होंने स्वयं पौधारोपण किया तथा छायादार और फलदार वृक्षों की संख्या बढ़ाने पर बल दिया। इसके अलावा खुली पार्किंग को कवर करने और पूरे परिसर की ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

कूड़े से संसाधन बनाने की दिशा में नई पहल

सहस्त्रधारा रोड स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड के निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष ने वहां पड़े ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक पुनः उपयोग की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस दिशा में नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कर ठोस रणनीति बनाने का निर्णय लिया गया है। उद्देश्य यह है कि कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन के रूप में विकसित किया जाए और पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक उपयोगिता भी सुनिश्चित हो।

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