
Date/18/05/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। श्रीराम कथा जीवन को तनाव मुक्त करने का एक दिव्य मार्ग है। देवभूमि देहरादून में गूंजा श्रीराम का दिव्य संदेश। श्री राम कथा के प्रथम दिवस पर हुआ सनातन, वेदांत और मानव चेतना के गहन रहस्यों का उद्धघाटन। देहरादून की पावन वादियों में भक्ति, आध्यात्मिकता और दिव्य चेतना का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब ‘दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान’ द्वारा आयोजित भव्य श्री रामकथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ हुआ। ‘परम पूज्य दिव्य गुरु आशुतोष महाराज’ की शिष्या एवं कथा व्यास साध्वी दीपिका भारती ने ‘‘मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- आदि पुरुष एवं समस्त विश्व के सांस्कृतिक पूर्वज’’ विषय पर ऐसी दिव्य अमृत वर्षा की, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को केवल कथा श्रवण ही नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद की अनुभूति भी प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसमें ईश्वर कथा की महिमा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा में अतिथि के रूप में अभिनव थापर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, प्रेसिडेंट न्यू टिहरी रामलीला कमेटी के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। कथा व्यास जी ने बताया कि जीवन के प्रत्येक कार्य का शुभारंभ तभी है, जब वह परमात्मा की स्मृति से हो। मधुर भजनों और भक्तिमय वातावरण ने आरंभ से ही ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित कर दिया, जिसमें प्रत्येक भक्तात्मा स्वयं को सांसारिक तनावों से दूर अनुभव करने लगी।
अपने उद्बोधन में साध्वी ने बताया कि विश्वभर में 300 से अधिक रामायणें प्रचलित हैं, किन्तु तीन रामायणें विशेष रूप से प्रमुख हैं गोस्वामी तुलसीदास जी कृत श्री रामचरितमानस, महर्षि वाल्मीकि जी कृत वाल्मीकि रामायण तथा योग वशिष्ठ, जिसे महा रामायण भी कहा जाता है। वेदांत दर्शन की गहराई को समझाते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानन्द जी के विचारों का उल्लेख किया कि ‘‘21वीं सदी का धर्म वेदांत होगा।’’ कथा में यह अद्भुत समन्वय देखने को मिला कि किस प्रकार प्राचीन ग्रंथों की दिव्य शिक्षाएं आज के तनावग्रस्त, दिशाहीन और मानसिक दबाव से जूझते समाज को नई दिशा प्रदान कर सकती हैं।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की विशिष्टता बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि ‘दिव्य गुरु आशुतोष महाराज’ के दिव्य मार्गदर्शन में संस्थान केवल शास्त्रों की चर्चा नहीं करता, बल्कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से उन्हें जीवन में प्रत्यक्ष अनुभव कराने का कार्य भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म जीवन से पलायन नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, सकारात्मक, तनाव मुक्त और सार्थक बनाने की एक दिव्य कला है।
कथा के दौरान यह भी बताया गया कि तीनों प्रमुख रामायण प्रश्नोत्तर शैली में रचित हैं। आज जिस प्रकार लोग पॉडकास्ट और संवादों के माध्यम से जीवन के उत्तर खोजते हैं, उसी प्रकार प्राचीन ऋषि-मुनियों ने भी शास्त्रों के माध्यम से मानव जीवन के गहन प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया। ‘‘जीवन क्या है?’’, ‘‘तनाव क्यों है?’’, ‘‘सुख कहाँ है?’’ – इन सभी प्रश्नों का उत्तर रामकथा में निहित है। कथा व्यास जी ने अत्यंत मार्मिक शब्दों में कहा कि जब आत्मा परमात्मा से दूर हो जाती है, तभी जीवन में तनाव जन्म लेता है और जब पुनः उनका मिलन होता है, तभी वास्तविक आनंद और शांति प्राप्त होती है।
देवभूमि उत्तराखंड की महिमा का स्मरण कराते हुए साध्वी ने कहा कि यह भूमि ऋषियों, तपस्वियों और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। किन्तु वर्तमान समय में मानव के स्वार्थ, प्रकृति से दूरी और सांस्कृतिक पतन के कारण समाज अनेक संकटों से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य स्वयं को भीतर से बदल ले, तो समाज, संस्कृति और प्रकृति, तीनों का पुनर्जागरण संभव है।
कार्यक्रम का एक अत्यंत मनमोहक एवं भावविभोर कर देने वाला प्रसंग लव-कुश रामायण की लोक शैली में प्रस्तुति रही। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं लव और कुश श्री राम की महिमा का गायन कर रहे हों। इस प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आने वाले दिनों की कथा के लिए और अधिक उत्साहित कर दिया।




