
Date/12/03/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान हरिद्वार द्वारा आयोजित प्रयोगात्मक षोडश संस्कार कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर प्रतिभागियों को वैदिक परम्पराओं से जुड़े महत्वपूर्ण संस्कारों का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य विशालमणि द्वारा अरणी मंथन, नामकरण संस्कार तथा निष्क्रमण संस्कार की विधियों का विस्तृत एवं व्यवहारिक प्रदर्शन किया गया।
कार्यशाला में प्रशिक्षक आचार्य अंकित बहुगुणा ने बताया कि अरणी मंथन वैदिक परम्परा में अग्नि उत्पन्न करने की प्राचीन वैज्ञानिक विधि है, जो भारतीय संस्कृति की मौलिकता और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाती है। इसके साथ ही नामकरण संस्कार की विधि, उसके धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व तथा शिशु के जीवन पर उसके प्रभाव के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई।
इसी क्रम में निष्क्रमण संस्कार की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया, जिसमें शिशु को पहली बार घर से बाहर लाकर प्रकृति एवं सूर्य के सान्निध्य से परिचित कराने की परम्परा के महत्व को समझाया गया। प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागियों ने इन संस्कारों को स्वयं करके उनकी विधि और महत्व को समझा। कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं संस्कार प्रेमियों ने इस प्रशिक्षण को भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रसार के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए आगामी सत्रों में अन्य संस्कारों के प्रशिक्षण की जानकारी भी दी। इस अवसर पर संयोजक सुभाष जोशी सहसंयोजक/नोडल अधिकारी मनोज शर्मा, श्री महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा ,विनय प्रजापति, योगेश सकलानी अनेक प्रशिक्षु मौजूद थे।




