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केदारनाथ की ‘रूप छड़’ को लेकर मचा हड़कंप

बीकेटीसी की अनुमति से महाराष्ट्र ले जाई गई थी धर्म दंड

Date/09/03/2026

Dehradun/Uttarakhand prime 24×7 

देहरादून। केदारनाथ धाम से जुड़े अत्यंत पवित्र धार्मिक प्रतीक धर्म दंड (रूप छड़) के भंडार गृह में न मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया। मामला सामने आने के बाद सरकार ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं बीकेटीसी के पदाधिकारियों की चुप्पी को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। धर्म दंड को बाबा केदार का स्वरूप माना जाता है और यह चल विग्रह डोली के साथ विशेष पूजा-अर्चना के दौरान रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका दर्शन करना भी केदारनाथ के दर्शन के समान पुण्यदायी माना जाता है।

देवभूमि उत्तराखंड के चारधामों की पूजा-पद्धति और परंपराओं का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। केदारनाथ धाम में चल विग्रह डोली के साथ चलने वाला धर्म दंड (रूप छड़) एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक है। यह चांदी से बना दंड होता है, जिस पर धार्मिक प्रतीक और वस्त्र लिपटे रहते हैं। पंडा-पुरोहितों के अनुसार यह प्रतीक स्वयं बाबा केदार का ही स्वरूप माना जाता है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी बीकेटीसी की होती है।

हाल ही में जब केदारनाथ धाम के भंडार गृह में धार्मिक प्रतीकों की जांच की गई तो धर्म दंड वहां मौजूद नहीं मिला। इसके बाद मंदिर प्रशासन और धर्मार्थ विभाग में हलचल मच गई। मामले को गंभीर मानते हुए उत्तराखंड सरकार के धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने सख्त आपत्ति जताई और जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के सभी धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा बीकेटीसी की जिम्मेदारी है और इतना महत्वपूर्ण प्रतीक इस तरह गायब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी कि धर्म दंड आखिर कहां गया और कैसे बाहर ले जाया गया।

जांच के दौरान सामने आया कि केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। इसी कार्यक्रम में धर्म दंड को भी भेजा गया था। बताया जा रहा है कि इसके लिए बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल ने 19 जनवरी 2026 को अनुमति प्रदान की थी। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह रावल का निजी कार्यक्रम था और ऐसी कोई परंपरा नहीं है जिसमें केदारनाथ धाम के धार्मिक प्रतीकों को अन्य राज्यों में ले जाया जाए।

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