Date/06/03/2026
Dehradun/Uttarakhand prime 24×7
देहरादून। प्रदेश में दिव्यांगता के फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल पूर्व में विभाग में 52 प्रवक्ताओं के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे, जिसके बाद विभाग स्तर से कार्रवाई का इंतजार हो रहा था। हालांकि इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, लेकिन अब विभाग ने सभी 234 प्रवक्ताओं के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच कराने का निर्णय लिया है, जिसके लिए एम्स में इन सभी प्रवक्ताओं की दिव्यांगता की जांच की जाएगी। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को लेकर उठे सवाल एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। पहले विभागीय जांच में 52 प्रवक्ताओं के दिव्यांगता प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद अब सरकार ने इस पूरे मामले को व्यापक स्तर पर जांचने का फैसला किया है।
इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने राज्य भर के सभी 234 प्रवक्ताओं के दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की दोबारा मेडिकल जांच कराने का निर्णय लिया है। यह जांच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के मेडिकल बोर्ड करेगा।
दरअसल शिक्षा विभाग में प्रवक्ता पद पर कार्यरत कई शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। विभागीय स्तर पर पहले भी इस मामले में जांच कराई गई थी, जिसमें 52 प्रवक्ताओं के प्रमाण-पत्र संदिग्ध या फर्जी पाए गए थे। इसके बाद विभाग की ओर से संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन उस स्तर से आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। ऐसे में अब पूरे प्रकरण ने विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती का रूप ले लिया है।
शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने यह कदम न्यायालय के निर्देशों के आधार पर उठाया है। राज्य में जिन भी प्रवक्ताओं ने दिव्यांगता के आधार पर लाभ लिया है, उन सभी की मेडिकल जांच कराई जाएगी, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आने पर उचित कार्रवाई की जा सके।
इस संबंध में शिक्षा महानिदेशालय की ओर से राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन निर्देशों के तहत दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सेवा में कार्यरत सभी 234 प्रवक्ताओं को मेडिकल परीक्षण के लिए एम्स ऋषिकेश में उपस्थित होना होगा। स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया 7 मार्च से शुरू की जाएगी। एम्स ऋषिकेश में जांच को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए अलग-अलग तिथियां तय की गई हैं। इसके तहत 7 मार्च के अलावा 12 मार्च, 14 मार्च, 28 मार्च और 2 अप्रैल को भी मेडिकल बोर्ड शिक्षकों की जांच करेगा। मुख्य शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में कार्यरत दिव्यांगता प्रमाण-पत्र वाले प्रवक्ताओं को इन तिथियों की सूचना दें और सुनिश्चित करें कि सभी शिक्षक निर्धारित समय पर जांच के लिए उपस्थित हों। शिक्षा निदेशक मुकुल सती ने कहा कि शिक्षा विभाग इस प्रकरण को लेकर पूरी तरह गंभीर है। जैसे ही विभाग को इस संबंध में शिकायत मिली, तभी से मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी हो, ताकि वास्तविक दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा की जा सके और फर्जी प्रमाण-पत्र के माध्यम से लाभ लेने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।




