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त्रियुगीनारायण मंदिर के शीतकाल में 40 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

त्रियुगीनारायण मंदिर के शीतकाल में 40 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

Date/22/02/2026

Rudraprayag/ Uttarakhand prime 24×7 

रुद्रप्रयाग। त्रियुगीनारायण मंदिर ने इस वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान आस्था का नया इतिहास रच दिया है। 24 अक्तूबर से 21 फरवरी तक चले शीतकालीन दर्शन काल में कुल 47,868 श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कर विश्व शांति, परिवार की समृद्धि एवं मंगलकामनाएं की। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह संख्या बीते वर्ष के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से अधिक है।

गौर हो कि पिछले वर्ष जहां शीतकालीन यात्रा का आंकड़ा लगभग 40 हजार के आसपास रहा था, वहीं इस बार यह बढ़कर 47 हजार के पार पहुंच गया। यह वृद्धि न केवल आस्था की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि शीतकाल में भी धार्मिक पर्यटन के निरंतर विस्तार का संकेत है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पवित्र धरा पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित अखंड अग्निकुंड को उसी दिव्य विवाह का साक्षी माना जाता है, जो युगों से निरंतर प्रज्वलित है। श्रद्धालु इस अग्नि को साक्षी मानकर वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

देशभर में “वेडिंग डेस्टिनेशन” के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके इस मंदिर में वर्षभर विवाह समारोह आयोजित होते हैं। विशेष रूप से शुभ मुहूर्तों में यहां नवयुगलों की लंबी बुकिंग सूची देखी जा रही है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर भी रिकॉर्ड संख्या में विवाह संपन्न हुए, जिसने मंदिर की राष्ट्रीय पहचान को और सुदृढ़ किया है। जहां अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान तीर्थाटन की रफ्तार धीमी हो जाती है, वहीं त्रियुगीनारायण में श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही ने नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। बर्फीली ठंड के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

मंदिर प्रबंधक अजय शर्मा ने बताया कि शीतकालीन यात्रा में इस बार अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। बेहतर सड़क संपर्क, ऑनलाइन सूचना प्रणाली और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ती लोकप्रियता ने भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। श्रद्धालुओं और विवाह समारोहों की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, पंडिताई व्यवस्था और परिवहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिला है। शीतकाल में भी बाजारों में रौनक बनी रही, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। वहीं 24 अक्तूबर से 21 फरवरी तक 47,868 श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे। बीते वर्ष से लगभग 7 हजार अधिक दर्शनार्थी मंदिर पहुंचे।

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