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नदियों का सीना चीरकर रॉयल्टी में लाखों-करोड़ों का गोलमाल

अलकनंदा-मंदाकिनी नदियों में चल रहा बड़े स्तर पर खनन, मौन बैठा प्रशासन

Date/12/02/2026

Rudraprayag/Uttarakhand prime 24×7 

रुद्रप्रयाग। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के किनारे अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि जिले में संचालित कुछ स्टोन क्रेशर और खनन पट्टों की आड़ में निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और सरकारी राजस्व दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जनपद में वर्तमान में सात निजी स्टोन क्रेशर और चार ई-टेंडरिंग खनन पट्टे संचालित हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर स्वीकृत घन मीटर से अधिक खनिज निकासी की जा रही है तथा भंडारण सीमा से अधिक सामग्री एकत्र की जा रही है। इससे नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव और तटों के कटाव की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नदी तलों से अत्यधिक खनन बाढ़ के जोखिम को बढ़ा सकता है और पुलों व सड़कों की संरचना को भी प्रभावित कर सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई स्थानों पर रात के समय भारी मशीनों की आवाजाही देखी जाती है।

उल्लेखनीय है कि जून 2024 में प्रशासन द्वारा अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक स्टोन क्रेशर को सीज किया गया था और 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके अतिरिक्त जुलाई 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर 48 स्टोन क्रेशरों के संचालन पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। हाल ही में ऊखीमठ क्षेत्र में भी खनन और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई की गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों के बावजूद स्थिति में स्थायी सुधार नहीं दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार अवैध खनन से करोड़ों रुपये के राजस्व की संभावित हानि हो रही है। रॉयल्टी निर्धारण और वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की नदियों और पर्यावरण को दीर्घकालिक क्षति हो सकती है।

सूत्रों से पता चला है कि खनन पट्टों और क्रेशरों में बड़े स्तर पर गोलमाल हो रहा है। डंपरों में माल 5 घन मीटर भरा जा रहा है, जबकि रॉयल्टी मात्र 3 घन मीटर की काटी जा रही है। जिससे जिला प्रशासन के राजस्व पर लाखों-करोड़ों का चूना लगने के साथ ही संचालक मौज काट रहे हैं। इसमें जहां खनन अधिकारियों की खनन पट्टा संचालकों से मिलीभगत होने के आरोप लग रहे हैं तो मित्र पुलिस की कार्यप्रणाली भी चैकिंग पोस्टों पर सवालों के घेरों में आ गई है। मामले में उप निदेशक एवं ज्येष्ठ खान अधिकारी बीरेन्द्र सिंह ने बताया कि जिले में सात क्रेशर संचालित हो रहे हैं, जबकि चार खनन के पट्टे पांच साल की अवधि के लिए दिए गए हैं। बीते दो फरवरी को अन्य 12 खनन के पट्टे भी ठेकेदारों को आवंटित किए गए हैं, जिसमें काम शुरू हो रहा है। उन्होंने बताया कि खनन पट्टों में रॉयल्टी का गोलमाल करने वाले संचालकों के विरूद्ध कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। मामले में जांच के आदेश दिए जाएंगे।

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