दारमा घाटी में चार साल बाद दिखा हिम तेंदुआ, स्नो कॉक भी कैमरे में हुई कैद
हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड की टीम ने कैमरे में कैद किया

Date/10/02/2026
Pithoragarh/Uttarakhand prime 24×7
पिथौरागढ़। प्रदेश के सीमांत पिथौरागढ़ के दारमा घाटी में चार साल बाद दुर्लभ हिम तेंदुआ नजर आया है। यह उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। उच्च हिमालय में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रही हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड की टीम ने इसे कैमरे में कैद किया है। हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड विषम परिस्थितियों में दारमा घाटी के उच्च हिमालय में हिम तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों को बचाने के लिए सात साल से काम कर रही है। टीम के जयेंद्र सिंह फिरमाल ने बताया कि जिले की दारमा घाटी में तीन साल बाद दुर्लभ हिम तेंदुआ और स्नो कॉक नजर आए हैं।
टीम के सदस्य जयेंद्र सिंह फिरमाल ने बताया कि दारमा घाटी में कई दुर्लभ वन्य जीव हैं। इनमें ब्लू शीप, हिमालयन थार, मोनाल, हेडेड वल्चर, स्नो कॉक, चुकाकार, फिंच और काला भालू मुख्य रूप से शामिल हैं। जयेंद्र सिंह फिरमाल ने बताया कि दारमा घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्र में फरवरी 2022 में भी हिम तेंदुआ नजर आया था। अब 2026 में हिम तेंदुए और स्नो कॉक उनके कैमरे में कैद हुए हैं। स्नो कॉक विलुप्ति की कगार पर हैं। अब यह बेहद दुर्लभ हो चुके हैं।
हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड की टीम के सदस्य जयेंद्र सिंह फिरमाल के अनुसार हिम तेंदुआ 3000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर रहता है। इसकी पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यह बेहद कम नजर आता है।
जयेंद्र फिरमाल ने बताया कि अवैध शिकार के कारण वन्य जीव लगातार संकट में पड़ रहे हैं। इसको देखते हुए हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड की टीम धारचूला की तीनों घाटियों दारमा, व्यास और चौदास के युवाओं को अपने साथ जोड़ने का काम कर रही है। ताकि वाइल्ड लाइफ टूरिज्म चले और हंटिंग से लोग दूर रहें। लोगों को पता चले कि हमारे लिए वन्य जीव क्यों जरूरी है?
यह एक जंगली मांसाहारी बिल्ली प्रजाति है, जिसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा उन्शिया है। हिम तेंदुए मध्य और दक्षिण एशिया के ऊंचे, ठंडे और पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। बर्फीले पहाड़ों में रहने के लिए खास तौर पर अनुकूलित होता है। शरीर हल्के धूसर या क्रीम रंग का होता है, जिस पर काले धब्बे होते हैं। मोटी और घनी फर इसे कड़ाके की ठंड से बचाती है। लंबी और मोटी पूंछ संतुलन बनाने और ठंड से बचाव में मदद करती है। पंजे बड़े होते हैं और उनके नीचे फर होता है, जिससे बर्फ पर पकड़ बनी रहती है। हिम तेंदुआ अकेला रहने वाला और घुमंतू स्वभाव का जानवर है। दहाड़ता नहीं, बल्कि गुर्राने और हिसकने जैसी आवाज़ों से संवाद करता है। अपने वजन से दो से तीन गुना भारी शिकार को भी मार सकता है।




