
Date/08/02/2026
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देहरादून/नई दिल्ली। सहकारिता को पुनर्जीवित करने वाले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ‘भारत टैक्सी’ का शुभारंभ केवल एक नई सेवा की शुरुआत भर नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित पड़े सहकारिता क्षेत्र के पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर सामने आया है। लंबे समय तक जर्जर अवस्था में पहुँची सहकारिता व्यवस्था को नई ऊर्जा देने का जो संकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिया, उसी संकल्प को ‘भारत टैक्सी’ के माध्यम से जमीन पर उतारने का कार्य शाह ने अपने मार्गदर्शन से साकार किया है, जिसका तीन साल के अंदर पूरे देश में विस्तार होगा।
जन-जन की राजनीति करने वाले शाह के मार्गदर्शन में भारत टैक्सी’ का उद्देश्य किसी सरकारी नियंत्रण को बढ़ाना नहीं, बल्कि सहकारिता की भावना को मजबूत करना है। यहाँ सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका से अधिक समाज की सामूहिक शक्ति को महत्त्व मिलता है। इसी सोच का विस्तार उस विचार में दिखाई देता है कि भारत टैक्सी से सरकार नहीं, सहकार, टैक्सी के क्षेत्र में प्रवेश कर रही है। यह विचार उस व्यापक परिवर्तन का संकेत देता है जिसमें व्यवस्था का केंद्र सत्ता नहीं, बल्कि समाज और साझेदारी बनती है। वर्षों से निजी कंपनियों के दबाव में काम कर रहे टैक्सी चालकों के लिए यह पहल सम्मान, पारदर्शिता और भागीदारी का नया द्वार खोलती है।
अंत्योदय की राजनीति को जीवन देने वाले अमित शाह की दृष्टि में सहकारिता के अंतर्गत ‘भारत टैक्सी’ केवल परिवहन सेवा नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है। भारत टैक्सी’ को ऐसे ढाँचे में गढ़ा गया है जहाँ श्रम करने वाला ही स्वामित्व का भागीदार बने, यही कारण है कि इसे विश्व की ऐसी अनूठी सहकारी टैक्सी सर्विस के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मालिक स्वयं सारथी होगा। यह परिवर्तन उस सोच को दर्शाता है जिसमें विकास का केंद्र अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति बनता है दृ और वही नए भारत की असली शक्ति भी।




