देहरादून। दून विश्वविद्यालय के सीनेट सभागार में नैड, एबीसी और डिजी लॉकर पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, यू. जी. सी. के संयुक्त सचिव डॉ. प्रदुम्न जोशी, नैड के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. गौरव खरे तथा निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. सी. डी. सूठा द्वारा किया गया ।इस कार्यशाला को सम्भोधित करते हुए कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि आज तकनीकी ने पूरी दुनिया कि तस्वीर बदल दी है जिससे शिक्षा जगत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। हमें तकनीकी का सम्यक प्रयोग कर संस्थाओं कि अकादमिक विशिष्टता के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि, आज का शिक्षक सिर्फ अपनी कक्षाओं तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसकी पहुँच वैश्विक हो चुकी है इसलिए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हमें हमने आपको तैयार करना होगा। नैड, एबीसी और डिजी लॉकर पर यह दो दिवसीय कार्यशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा।इस अवसर पर संयुक्त सचिव डॉ. तेजस प्रद्युम्न जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड का शिक्षा के क्षेत्र में एक विशेष स्थान है और इसे हर संभव सहायता प्रदान कि जाएगी. उन्होंने कहा कि एबीसी विभिन्न ज्ञान धाराओं को एक साथ जोड़ने के एक सेतु के रूप में कार्य करता है जिसका उदहारण हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति में भी दिखाई देता है। यह छात्रों को अधिक अवसर प्रदान करता है, जिससे वो अपनी क्षमताओं का अधिक विस्तार कर सकते हैं । नैड के नेशनल कोऑर्डिनेटर गौरव खरे ने कहा कि डीजी लाकर और एबीसी राज्य के दूरस्थ क्षेत्र के छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है और बिना किसी अवरोध के हम कहीं भी अपने डिजिटल अभिलेखों को वेरीफाई और उपयोग कर सकते हैं । डिजिटल तकनीकी के माध्यम से समस्याओं का समाधान हो सकता है, जिसके लिए संस्थानों को तीव्र गति से छात्रों के मार्कशीट और डिग्री को अपलोड और वेरीफाई करना होगा । निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. सी. डी सूठा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप नैड, एबीसी और डिजी लॉकर पर पंजीकरण और प्रभावी क्रियान्वयन को और तीव्र किया जाएगा । उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न क्रेडिट आधारित कोर्स छात्रों को कौशल विकास के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है ।