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40 हजार को बता दिया 400 करोड़ का घोटालाः अनिल यादव

यूपीसीएल के एमडी ने बॉबी पंवार के आरोपों का दिया जवाब

दिनांक/12/11/2024

Dehradun/Uttarakhandprime 24×7 

देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के एमडी अनिल यादव का एक्सटेंशन इन दिनों चर्चाओं में है। जिस पर प्रदेश में जमकर बयानबाजी हो रही है। इसी को लेकर ऊर्जा सचिव मीनाक्षी सुंदरम और बेरोजगार संघ के संयोजक बॉबी पंवार के बीच भी विवाद हुआ था। इन सभी विवादों पर मंगलवार 12 नवंबर को यूपीसीएल के एमडी अनिल यादव ने प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा। यूपीसीएल के एमडी अनिल यादव ने 400 करोड़ की गड़बड़ी, आय से अधिक संपत्ति और बेटे के खाते में आए पैसे के आरोपों को खारिज किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि वो तीन सालों से यूपीसीएल के एमडी हैं। इसके अलावा पिटकुल के भी एमडी रहे हैं। इस दौरान उनके कार्यकाल में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। बता दें कि बेरोजगार संघ के संयोजक बॉबी पंवार ने भी देहरादून में प्रेस वार्ता कर यूपीसीएल के एमडी अनिल यादव पर कई आरोप लगाते हुए उनके एक्सटेंशन (सेवा विस्तार) पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि यूपीसीएल के एमडी अनिल यादव ने बॉबी पंवार के सभी आरोपी को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि जिन मुद्दों को लेकर उनके खिलाफ सवाल उठाये जा रहे हैं वो बेबुनियाद हैं। उनके ऊपर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वो सभी पिटकुल (पावर ट्रांसमिशन कॉपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) में एमडी के पद के दौरान के हैं, जो सरकार गलत हैं।

यूपीसीएल के एमडी अनिल यादव और ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया है। एमडी ने कहा है कि सेवा विस्तार देना राज्य सरकार का विषय है। उत्तराखंड शासन के अधीन तीनों निगमों के प्रबंध निदेशक और निदेशकों की शैक्षिक योग्यता, अनुभव और सेवा स्तर सहित अन्य शर्तों के लिए नियमावली 2021 में जारी हुई है। इस नियमावली में निहित प्रावधानों के तहत राज्य सरकार द्वारा सेवा विस्तार दिया जाता है। साथ ही प्रबंध निदेशक और निदेशकों के पद पर चयन पांच साल के लिए होता है। तीन साल के कार्यकाल के बाद सरकार दो साल विस्तार देती है।

यूपीसीएल के एमडी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि साल 2014 में उनके बेटे ने बीटेक करने के बाद देहरादून में तीन महीने की इंटर्नशिप की। उस समय वह मुख्य अभियंता के पद पर तैनात थे। उन्होंने बेटे की इंटर्नशिप कराने को तत्कालीन एमडी से लिखित मंजूरी ली थी। तीन महीने में उनके बेटे के खाते में 40 हजार रुपए आए थे, जो किसी भी तरह की रिश्वत नहीं थी, बल्कि इंटर्नशिप के थे। लेकिन 40 हजार रुपए को बढ़ाचढ़ा कर 400 करोड़ की गड़बड़ी और 400 करोड़ की संपत्ति का हल्ला मचाया जा रहा है।

अनिल यादव ने कहा कि मेसर्स ईशान वाले प्रकरण में उन्होंने हाईकोर्ट में पैरवी नहीं की, लेकिन जब ये प्रकरण हाईकोर्ट में था, तब वो एमडी पिटकुल नहीं थे। साथ ही मेसर्स आईएमपी के 18 ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता को लेकर अनिल यादव का कहना है कि ये सभी ट्रांसफार्मर सही थे, उनको गलत तरीके से चलाया गया। साथ ही इन ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता के मामले में आईआईटी रुड़की, सीपीआरआई बैंगलोर ने भी अपनी रिपोर्ट में सही बताया है। साल 2014 से 2016 के बीच प्डच् कम्पनी से खरीदे गए 18 ट्रांसफार्मर पर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, वे आज भी सही काम कर रहे हैं।

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