उत्तराखंड

लीसा दोहन से रोजगार सृजन एवं वनाग्नि सुरक्षा जन-जागरूकता कार्यक्रम किया शुरू

कार्यक्रम की शुरुआत ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने का प्रयास

Date/10/02/2026

Pauri/Uttarakhand prime 24×7 

पौड़ी। जनपद में हर वर्ष जंगलों में लगने वाली आग से होने वाले नुकसान को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वन विभाग पौड़ी ने इस बार एक नई पहल शुरू की है। विभाग की ओर से लीसा दोहन से रोजगार सृजन एवं वनाग्नि सुरक्षा जन-जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत कर ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि लीसा दोहन केवल वन संपदा संरक्षण का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीणों खासकर महिला समूहों के लिए स्वरोजगार का बड़ा अवसर है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों की आय में वृद्धि होगी।

पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम में जनसहभागिता बेहद जरूरी है और ऐसे कार्यक्रम लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होने से पलायन पर भी रोक लगेगी। साथ ही उन्होंने वनाग्नि सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए आम जनता से वन संरक्षण में सहयोग की अपील की। इस पहल से उम्मीद है कि एक ओर जहां जंगलों को आग से बचाया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को स्थायी आजीविका का नया साधन भी मिलेगा। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि प्रसिद्ध लोकगायक गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की सुमधुर एवं प्रेरणादायक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से वन संरक्षण और वनाग्नि सुरक्षा का संदेश प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया गया।

गढ़वाल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने बताया कि वन विभाग द्वारा लीसा विदोहन (राल निकासी) की प्रक्रिया को पूरी तरह संगठित, वैज्ञानिक और सुरक्षित पद्धति से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परंपरागत तरीके से होने वाले अवैज्ञानिक दोहन के स्थान पर अब प्रशिक्षित श्रमिकों और निर्धारित मानकों के अनुरूप पेड़ों को बिना नुकसान पहुंचाए लीसा निकाला जा रहा है, जिससे वन संपदा का संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी हो पा रहा है।

उन्होंने बताया कि लीसा से प्राप्त राजस्व का एक बड़ा हिस्सा ग्राम पंचायतों को दिया जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सामुदायिक भवन, स्वच्छता और अन्य जनहित के विकास कार्यों को गति मिलती है। इस प्रकार वन विभाग की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में सहायक बन रही है। डीएफओ ने कहा कि नियंत्रित एवं वैज्ञानिक लीसा विदोहन से चीड़ के पेड़ों में ज्वलनशील पदार्थों का दबाव कम होता है, जिससे गर्मियों के दौरान वनाग्नि की घटनाओं में कमी आने की संभावना रहती है।

इसके अतिरिक्त स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं को मौसमी ही नहीं बल्कि सतत रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं, जिससे पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान वन विभाग द्वारा लीसा विदोहन, वनाग्नि रोकथाम और वन संरक्षण के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। नुक्कड़ नाटकों, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को जंगलों के महत्व, आग से होने वाले नुकसान तथा सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता के बारे में समझाया गया। विभागीय अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच संवाद स्थापित कर सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया, ताकि जनसहभागिता और विभागीय समन्वय से वन संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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