उत्तराखंड

लचीला परिदृश्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर संगोष्ठी का आयोजन

देहरादून। भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आई सी ऍफ आर ई) देहरादून और इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशनस (आईयूएफआरओ) द्वारा संयुक्त रूप से श्लचीला परिदृश्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 29-30 मार्च को किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, कनाडा, जर्मनी, नीदरलैंड, नेपाल, चीन, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, इथियोपिया, मलावी, चीन और श्रीलंका से कुल मिलाकर 225 वानिकी, कृषि, प्रकृति संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और खनन के क्षेत्रों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक सम्मिलित हो रहे हैं जो क्षरित हुई भूमि और वनों की बहाली के मुद्दों और इसके लिए अंतरक्षेत्रीय नीति और योजना समन्वय बढ़ाने पर चर्चा करेंगे तथा इस दिशा में हुए प्रयासों और अनुभवों को साझा करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत आज आईसीएफआरई के सभागार में उद्घाटन समारोह के साथ हुई।सुभाष चंद्रा, सीईओ, कैम्पा, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। डॉ. जॉन ऐ.पैरोटा, प्रोग्राम लीडर, यू.एस. फॉरेस्ट सर्विस, ने अध्यक्ष के रूप में आईयूएफआरओ का प्रतिनिधित्व किया। आर.के. डोगरा, प्रभारी निदेशक, आईसीएफआरई-एफआरआई, देहरादून ने गणमान्य व्यक्तियों, विशेष आमंत्रितों, विभिन्न संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों और सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया और संगोष्ठी की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी।पर्यावरण और भूमि पर विकास गतिविधियों के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए, मुख्य अतिथि सुभाष चंद्रा ने पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाइफ मिशन पहल के उद्देश्यों पर बात की। उन्होंने कृषि, वानिकी, बागवानी, कृषिवानिकी और प्रकृति संरक्षण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाने, विभिन्न हितधारकों जैसे सरकारों, नागरिकों, निजी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों की समग्र प्रतिभागिता सुनिश्चित करने, और जलवायु-स्मार्ट वानिकी और कृषि प्रथाओं का उपयोग करने का सुझाव दिया जिससे भूमिक्षरण को रोका जा सके। इस संबंध में उन्होंने कैम्पा, राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम, हरित भारत मिशन और नगर वन योजना आदि जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत मंत्रालय के चल रहे प्रयासों को भी साझा किया।

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